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स्वास्थ विभाग की टीम ने मारा छापा

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दुर्गा भवन मंदिर के पीछे डेरियों में चल रहे‌ मिठाई गोदाम पर रविवार की दोपहर में स्वास्‍थ्य विभाग
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दीपावली के चलते गोदामों में बड़े पैमाने पर बनाकर रखी सैकड़ों किलो मिलावटी मिठाई का भंडाफोड़ होने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रविवार को कई मिठाई की दुकानों व गोदामों पर छापे मारे। छापे के दौरान बड़े-बड़े लोहे के टबों में भरे छैना रसगुल्ला, रसगुल्ला के अलावा मिल्क केक, बर्फी आदि के 10 सैंपल भरे। इस दौरान डेयरी एरिया में मिठाई की दुकान के संचालकों में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते शटर गिरा दिए गए। छापामार टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी सिविल सर्जन हेल्थ डॉ. केएल मलिक ने कहा कि नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई होगी। वहीं, मावे में दूध पाउडर की मिलावट के बारे में पूछने पर छापा टीम में शामिल अधिकारी ने अजीब तर्क देते हुए कहा - इससे मिठाई बनाई जा सकती है। जब उनसे पूछा गया कि मावा की मिठाई के रेट लेकर मिल्क पाउडर की मिठाई बेचना क्या उचित है, तो उनका जवाब था कि हम रेट नहीं देखते। रेट को देखने का काम प्रशासन का है।
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अमर उजाला ने रविवार के अंक में खुलासा किया है कि दीपोत्सव को लेकर अभी तक मिठाई के कारखानों में दिनरात मिलावटी मिठाई बनाई जा रही है। इसकी वजह से दुकान पर 80 रुपये किलो छैना रसगुल्ला तो 85 रुपये किलो रसगुल्ला बिक रहा है। मिल्क केक 160 से 170 रुपये किलो है। त्योहार पर उपहार स्वरूप दी जाने वाली मिठाई आर्डर बुक कराने पर दुकानदार रेट कम लगाने की हामी भी भर रहे हैं। जबकि दुकानदार स्वयं मानते हैं कि शुद्ध मावे का रसगुल्ला 400 और मिल्क केक 450 रुपये से कम में नहीं मिलेगा। मिठाई के इन दामों में इतना बड़ा अंतर होने से साफ जाहिर होता है कि बाजार में कई दुकानों पर मिलावटी मिठाई बिक रही है। रविवार को जब खबर प्रकाशित हुई तो उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन को छापामार कार्रवाई करने के आदेश दिए। जांच टीम में फूड एंड ड्रग विभाग के नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह, सहायक सुनील व संदीप शामिल रहे।
मिठाई के गोदामों व दुकानों को बंद कर अंदर से कुंडी लगा ली
अवकाश के बावजूद डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक अपनी टीम के साथ जब डेयरी वाले एरिया की एक दुकान पर पहुंचे तो आसपास की मिठाई के गोदामों व दुकानों को बंद कर अंदर से कुंडी लगा ली गई। टीम ने जैसे-जैसे दरवाजे व शटर खुलवाये वैसे-वैसे अंदर मिठाई निर्माण कार्य सार्वजनिक होता रहा। लोहे के बड़े-बड़े टबों के अंदर सैकड़ों किलो छैना रसगुल्ला व रसगुल्ला भरा मिला। एक बड़ी परात के अंदर सफेद पाउडर और नजदीक में पाउडर से बनाया गया मावा रखा मिला। इसके बाद टीम ने मिठाई और मावा के सैंपल जांच के लिए भरे। वहीं, मिठाई की दुकानों व गोदामों में छापे की खबर से न सिर्फ डेयरी मोहल्ला के दुकानदार बल्कि आसपास मिठाई बेचने वालों में हड़कंप मच गया। मौका देखकर नहीं लग रहा था कि यहां बहुत सारी मिठाई की दुकानें अभी खुली थी।
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छैना के रसगुल्लों में मिला रीठा
छैना के रसगुल्लों से भरे ड्रमों के अंदर रीठा मिला। बताते चलें रीठा को महिलाएं एक शैंपू के साथ मिलाकर बालों को धोती हैं, इससे बाल मुलायम और मजबूत बने रहते हैं। रीठा में कास्टिक का काफी मात्रा में अंश होता है। गोदाम में काम करने वाले एक कारीगर ने बताया कि रीठा छैना के रसगुल्ला में इसलिए डाला जाता है ताकि वह सफेद बना रहे।
छापामार टीम के अफसरों का अजीब तर्क, बोले - दूध पाउडर से बनाई जा सकती है मिठाई
इस दौरान छापा मारने वाली टीम के अफसरों का बड़ा ही अजीब तर्क मौके पर सुनने को मिला। जांच के लिए मौके पर पहुंचे अधिकारी मिलावटी मावा से बनने वाली मिठाई को ही क्लीन चिट देने लगे। डिप्टी सिविल सर्जन, डॉ. केएल मलिक और पृथ्वी सिंह, फूड एड ड्रग विभाग के नामित अधिकारी ने एक परांत में भरा मिला सूखा दूध पाउडर उठाते हुए कहा कि इससे मिठाई बनाई जा सकती है। जब उनसे पूछा गया कि मावा की मिठाई के रेट लेकर मिल्क पाउडर की मिठाई बेचना क्या उचित है, तो उनका जवाब था कि हम रेट नहीं देखते। रेट को देखने का काम प्रशासन का है। हम तो शुद्धता की जांच करते हैं।
छह घंटे में भरे दस सैंपल
रविवार को सायं चली छापामारी तकरीबन छह घंटे चली और दस सैंपल भरे गए। जांच सैंपल में खोया, रस गुल्ला, मिल्क केक, कलाकंद बर्फी, पेड़ा, बेसन लड्डू आदि के सैंपल भरे गए।
मिलावट एक गंभीर विषय है, संबंधित विभाग को लगातार छापामारी के आदेश दिए गए हैं। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
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- आरएस वर्मा, उपायुक्त
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