महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा द्वारा रविवार को दयानन्द मठ, रोहतक में आर्य महासम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पंडित जगदेव सिंह सिद्धान्ती भवन में किया गया, जहां 150 वर्षों में आर्य समाज द्वारा समाज को दी गई दिशा और योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
गुजरात के राज्यपाल और शिक्षा मंत्री ने दिया संदेश
कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अपना संदेश दिया। उन्होंने आर्य समाज के सामाजिक सुधार कार्यों और समाज में समानता, शिक्षा और धार्मिक चेतना के प्रसार में निभाई गई भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा की। मंच पर पहुंचने पर दोनों गणमान्य अतिथियों का जोरदार स्वागत किया गया।
हरियाणा के राज्यपाल ने की आर्य समाज के प्रयासों की सराहना
महासम्मेलन में जैसे ही हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय मंच पर पहुंचे, वहां उपस्थित सैकड़ों लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि आर्य समाज ने बीते 150 वर्षों में समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। महर्षि दयानन्द सरस्वती के विचारों ने समाज में समानता, शिक्षा और नारी उत्थान को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि आज भी महर्षि के विचार प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं।
आर्य समाज के 150 वर्षों के योगदान पर चर्चा
आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा, दयानन्द मठ रोहतक के प्रधान देशबंधु मदान ने कहा कि आर्य समाज ने पिछले 150 वर्षों में समाज सुधार, धार्मिक जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने सत्य और न्याय के लिए जीवनभर संघर्ष किया और समाज को वेदों के ज्ञान के माध्यम से सही मार्गदर्शन दिया।
प्रमुख गणमान्य लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के सभामंत्री उमेद शर्मा, सभा कार्यालयाध्यक्ष सत्यवान आर्य, वेद प्रचार मंडल रोहतक के प्रधान सुभाष सांगवान, हवासिंह राठी, रामकिशन बाल्याण, बलराज खुराना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने आर्य समाज के योगदान को सराहा और समाज में जागरूकता लाने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
भविष्य में भी समाज सुधार के प्रयास जारी रहेंगे
कार्यक्रम के समापन पर प्रधान देशबंधु मदान ने कहा कि आर्य समाज का उद्देश्य हमेशा समाज में समानता, शिक्षा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना रहा है और यह कार्य भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे महर्षि दयानन्द सरस्वती के विचारों को आत्मसात करें और समाज में शिक्षा और जागरूकता का प्रसार करें।