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कोरोना के बहाने किसानों को दिल्ली की सीमाओं से हटाना चाहती है सरकार : चढ़ूनी

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टीकरी बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह चढ़ूनी। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना सोमवार को भी जारी रहा। बॉर्डर पर हुई सभा में भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत कई किसान नेताओं ने आंदोलनकारी किसानों को संबोधित किया। चढ़ूनी ने कृषि कानूनों के नुकसान बताए और संगठित रहकर आंदोलनरत रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना के बहाने किसानों को दिल्ली की सीमाओं से हटाना चाहती है। इसलिए सीमाओं पर किसानों की संख्या बढ़ाएं और आंदोलन को मजबूत करें।
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गुरनाम सिंह चढूनी ने टीकरी बॉर्डर पर मेट्रो पिलर 762 के पास अपनी यूनियन के कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि सरकार अनेक साजिश कर किसान आंदोलन को खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ये तीन कानून ही किसानों के लिए नुकसानदायक नहीं हैं। किसान इन कानूनों से पहले भी सुखी नहीं थे। पहले भी 36 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार ने किसानों की फाइलों को दबा दिया और किसानों पर ही मुकदमे दर्ज कर दिए। असलियत ये है कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से खेती घाटे का सौदा हो चुकी है, किसान अपने घर के खर्चे नहीं चला पा रहे, जिस कारण आत्महत्या करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में सभी साधन हैं, लेकिन सरकार ने इन साधनों का ठीक प्रकार से बंटवारा नहीं किया है। सबके साधनों पर पूंजीपतियों ने कब्जा कर रखा है। सरकार के पास प्रॉपर्टी, पैसा, माल सबकुछ है लेकिन उन सभी चीजों पर कब्जा पूंजीपतियों का है। अडानी की आय कई गुणा बढ़ी है, लेकिन किसान और गरीब हुआ है। पंजाब का किसान दस हजार रुपये प्रति माह प्रति परिवार बचा रहा है, हरियाणा का किसान अठत्तर सौ रुपये प्रति माह बचा रहा है। कर्ज न चुकाने पर किसान को तो जेल तक में डाल दिया जाता है, लेकिन अरबों रुपये कर्ज नहीं चुकाने वाले पूंजीपति को कभी डिफाल्टर घोषित नहीं किया जाता। किसान का नाम डिफाल्टरों में आगे लिखा जाता है।
चढ़ूनी ने कहा कि पूरी दुनिया इस आंदोलन को देख रही है। हमने व्यवस्था बदलनी है। सरकार सभी नीतियों में गड़बड़ कर रही है। हम इनके खिलाफ लड़ेंगे। सरकार किसानों को इस आंदोलन से कोरोना का नाम लेकर उठाना चाहती है। वह कहेगी किसान मास्क बिना बैठे हैं। हमें डराया भी जाएगा, आंदोलन से हटाने के लिए हमसे बार-बार अपील भी की जाएगी। हम नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसानों में कोरोना होता तो हजारों किसान मर जाते लेकिन हमारा एक भी किसान बीमार नहीं हुआ है। जब तक हम जीत नहीं जाएंगे, हम अपने घर नहीं जाएंगे।
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