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Rohtak News: करोड़ों का बजट मिला, पर जनता को लाभ नहीं

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रोहतक। नगर निगम प्रशासन बेवजह ही बजट की कमी बता रहा है। हकीकत में सरकार ने विकास के लिए करोड़ों रुपये का बजट दिया, लेकिन आम शहरवासी को इसका फायदा नहीं मिल सका। निगम हाउस की बैठक में पार्षद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधयों से जवाब मांगेंगे। हालांकि 14 जुलाई को प्रस्तावित बैठक रद्द हो गई है। दिसंबर 2019 में नगर निगम मेयर व 22 पार्षदों का चुनाव हुआ था, जिसमें भाजपा के मनमोहन गोयल मेयर चुने गए थे। साथ ही हाउस के अंदर निर्दलीय पार्षदों के शामिल होने के बाद हाउस में भाजपा पार्षदों की संख्या 20 हो गई थी। केवल वार्ड 11 से कदम सिंह अहलावत व वार्ड 15 से गुलशन ईशपुनियानी ने पाला नहीं बदला। केंद्र व राज्य के अलावा निगम में भी भाजपा सत्ता में होने के बावजूद शहर का विकास नहीं करवा सकी। अब भी करोड़ों रुपये की योजनाएं धूल फांक रही हैं। जबकि उनके ऊपर बजट भी खर्च हो चुका है।
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भगत सिंह कामर्शियल काॅम्प्लेक्स : सात साल बाद भी किराये पर नहीं दी गई दुकानें
नगर निगम ने कांग्रेस के कार्यकाल में 2011 में भगत सिंह पार्क की जगह कामर्शियल कांप्लैक्स एवं पार्किंग का काम शुरू कराया। अप्रैल 2017 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कांप्लैक्स का उद्घाटन भी किया, लेकिन अभी तक अधिकारी कांप्लैक्स की दुकानों को किराये या लीज पर नहीं दे सके। पार्किग भी सही तरह से चालू नहीं हो सकी। अब पुलिस की सख्ती के बाद दुकानदार व ग्राहक पार्किंग के अंदर दोपहिया वाहन खड़े करने लगे हैं।

छोटूराम चौक रोड की दुकानें : बिना किराये पर दिए दो बार मरम्मत करवा चुका निगम
नगर निगम की तरफ से गोहाना अड्डे से छोटूराम चौक की तरफ आने वाले रोड पर सिविल अस्पताल के साथ लगती जमीन पर आठ दुकानें बनाई थी। छह साल में निगम दुकानों को किराये या लीज पर नहीं दे सका है। ऊपर से दो बार मरम्मत के नाम पर पैसे भी खर्च चुके हैं। यह अधिकारियों की नाकामी नहीं तो क्या है।
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अप्पू घर : लाखों खर्च, फिर भी उग रही घास
छोटूराम चौक से आगे सिविल रोड पर अप्पू घर है, जहां निगम दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक मार्केट बनाना चाहता था। निगम इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन पांच साल बाद भी काम अधूरा पड़ा है। पिलर अधूरे पड़े हैं। जगह-जगह घास पैदा हो गई है।

अमृत योजना : फायदे से ज्यादा गड़बड़ी के लिए चर्चित
केंद्र सरकार ने शहर में सीवरेज व पेयजल लाइन की व्यवस्था करने के लिए साढ़े 300 करोड़ रुपये नगर निगम को दिए थे। 2018 से अब तक निगम योजना को पूरा नहीं करवा सका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहले की तरह जलभराव से लेकर पेयजल की समस्या बरकरार है।

पार्षदों का वहीं एजेंडा, टूटी सड़क, गलियां और अधूरे पड़े विकास कार्य
नगर निगम हाउस की बैठक के लिए 22 निर्वाचित पार्षदों ने एजेंडे भेजे हैं। उनमें ज्यादातर ने टूटी सड़क व गलियों से लेकर अधूरे पड़े विकास कार्य पूरे कराने से लेकर नए कार्य शुरू कराने की मांग की है।

भगत सिंह काॅम्प्लेक्स और सिविल अस्पताल के सामने की दुकानों को किराये या लीज पर देने के लिए रेट तय करने के लिए फाइल मंडल आयुक्त के पास भेजी गई थी। जैसे ही रेट तय होते हैं, दुकानों को किराये या लीज पर दे दिया जाएगा। सरकार ने अनुमति दी तो दुकानों को सेल भी किया जाएगा।
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धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त, नगर निगम
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