रोहतक। पर्यावरण प्रदूषण की बड़ी वजह बन चुके प्लास्टिक कचरे का निपटान चुनौती बन गया है। प्लास्टिक कचरे का उपयोग बिजली बनाने में किया जा सकता है। इससे कचरे के निपटान के साथ बिजली भी मिलेगी। सरकारी स्कूल की दो छात्राओं ने अपने मॉडल में इस कचरे से निपटान की राह सुझाई है। यह मॉडल सोनीपत में आयोजित प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हिसार रोड रोहतक की छात्राओं ने प्लास्टिक वेस्ट डिस्पोजल प्लांट नामक प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदल दिया है। प्रोजेक्ट में पायरोलिसिस तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके माध्यम से प्लास्टिक को गैसीय ईंधन में परिवर्तित कर बिजली उत्पन्न की जा सकती है। इस तकनीक में प्लास्टिक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उच्च तापमान पर गर्म करने के लिए गैसीकरण चेंबर में भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक गैसीय ईंधन (एसवाईएन गैस : सीओ जमा एच2) में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद इस गैसीय ईंधन को क्लीनिंग के लिए वाटर स्क्रबर और साइक्लोन सेपरेटर चेंबर में भेजा जाता है। इस गैस को साफ करके बिजली उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है।