रोहतक। टोक्यो ओलंपिक के महज 39 दिन शेष हैं। सात साल पहले कुश्ती शुरू करने वाली जींद के गांव निडानी की 19 वर्षीय अंशु मलिक पोलैंड की अकादमी में कड़ा अभ्यास कर रही हैं। अभ्यास के दौरान उसे जिस भी दांव पेच में दिक्कत आती है, वह बाद में पिता से कोच के फोन पर उन दिक्कतों के बारे में पूछती हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पिता धर्मवीर मलिक उन दिक्कतों का हल बताते हैं। फिर अगली बार अंशु उन्हें आजमाती हैं। अंशु का यह पहला ओलंपिक है। वह देश की झोली में स्वर्ण पदक डाल कर पिता के सपनों को पूरा करना चाहती हैं। इसके लिए वह सुबह-शाम करीब 8 घंटे का कड़ा अभ्यास कर रही हैं। गौरतलब है कि अंशु के पिता, भाई व ताऊ अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं।
पिता ने करवाया हुआ है अंशु का फोन बंद
पिता धर्मवीर बताते हैं कि अंशु के साथ न केवल परिवार, बल्कि पूरे देश की उम्मीद जुड़ी हुई है। करोड़ों लोगों की उम्मीदों के बीच वे किसी भी तरह की बाधा को नहीं आने देना चाहते हैं। जिसके लिए उन्होंने अंशु को कहकर उनका मोबाइल फोन बंद करवाया हुआ है। इसके अलावा अगर अंशु से परिवार वालों को बात करनी हो तो वे कोच के फोन से एक निर्धारित समय में बात करते हैं।
दिग्गज खिलाड़ियों के वीडियो देख सीख रहीं गुर
अंशु सुबह-शाम के आठ घंटे के कड़े अभ्यास के बाद अपने खाली समय में अकादमी में लगीं एलईडी पर यू ट्यूब के माध्यम से दिग्गज कुश्ती खिलाड़ियों के वीडियो देख गुर भी सीख रही हैं। इनको वह अगले दिन अभ्यास के दौरान आजमाती हैं। वीडियो देखने से अभ्यास में सुधार आ रहा है।
अंशु राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जीत चुकीं ये खिताब
- 2016 में एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में रजत और फिर विश्व कैडेट चैंपियनशिप में कांस्य जीता
- 2020 जनवरी में अपना पहला सीनियर टूर्नामेंट खेला। अब टोक्यो का टिकट कटाने वाली चार महिला पहलवानों में हैं शामिल
- सीनियर स्तर के छह टूर्नामेंट में लिया है अब तक भाग, पांच में जीते पदक। इसमें एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी शामिल।