नारनौल। महेेंद्रगढ़ के एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर 20 लाख रुपये ठगने के मामले में महेंद्रगढ़ पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश मेरठ निवासी करन सिंह, कुलदीप व विक्की और भिवानी निवासी विकास हैं। तीनों को मुजफ्फरनगर, मेरठ और हांसी क्षेत्र से पकड़ा गया।
महेंद्रगढ़ निवासी पीड़ित व्यक्ति के फोन पर 5 जुलाई को कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टीआरएआई अधिकारी बताया और कहा कि उनका मोबाइल नंबर एक संदिग्ध बैंक खाते से जुड़ा है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
इसके बाद मुंबई के वर्ली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा गया। पीड़ित ने असमर्थता जताई तो ठग ने उसे एक फर्जी पुलिस अधिकारी से बात करवाई।
फर्जी पुलिस अधिकारी ने पीड़ित को बताया कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है और उनके नाम पर अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद व्हाट्सएप पर एक फर्जी साइबर क्राइम कोलाबा मुंबई का मैसेज आया। ठगों ने एक नकली कोर्ट की सुनवाई दिखाई। इसमें एक व्यक्ति जज और दूसरा पुलिस अधिकारी की वर्दी में था।
ठगों ने डरा धमकाकर पीड़ित से 20 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। बाद में जब पीड़ित को टीआरएआई का एक मैसेज मिला जिसमें इस तरह की ठगी से सावधान रहने को कहा गया था। तब उनको ठगी का शिकार होने का अहसास हुआ। इसके बाद उसने शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले में पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के निर्देश पर महेंद्रगढ़ साइबर थाना की पुलिस टीम ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी उत्तर प्रदेश मेरठ निवासी करन सिंह के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया था।
मेरठ निवासी कुलदीप फर्जी बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। मेरठ निवासी विक्की ठगी की गई रकम को आगे ट्रांसफर करता था। भिवानी निवासी विकास ने जोधपुर में चेक के माध्यम से ठगी की कुछ रकम निकाली थी और वह भी रकम ट्रांसफर करने में शामिल था।
पुलिस ने आरोपी करन और कुलदीप को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि विक्की और विकास पुलिस रिमांड पर हैं।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जहां अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, या पुलिस अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो या ऑडियो कॉल करके पीड़ित को धमकाते हैं कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आपराधिक मामले में आया है। इसके बाद वे पीड़ित को डराकर उन्हें उनसे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। इस दौरान वे पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करते हैं, ताकि उन्हें किसी से बात करने या मदद लेने का मौका न मिले।
साइबर ठगी से कैसे बचें
किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल पर अपनी निजी या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आपसे संपर्क करे, तो उसकी पहचान को सत्यापित करें। आप सीधे संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। अगर कोई आपको डरा धमकाकर वीडियो कॉल पर कुछ करने को कहता है, तो तुरंत कॉल काट दें और पुलिस को सूचित करें। अपने बैंक खाते, पासवर्ड, और ओटीपी जैसी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर अपराध के नए तरीकों के बारे में हमेशा अपडेट रहें और इस जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी साझा करें।