रोहतक। वनवासी, भारत की आजादी की लड़ाई के अनसंग हीरो हैं। देश की आजादी के आंदोलनों में वनवासियों का अहम योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में वनवासियों के बलिदान को युवा पीढ़ी जाने, उनके संघर्ष, त्याग और शहादत को याद करें। यह बात कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के स्वराज सदन में स्वतंत्रता संग्राम में वनवासी वीरों का योगदान विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन समारोह में कही। कार्यक्रम का आयोजन चौ. रणबीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
कुलपति ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए वनवासियों के बलिदान को जानना जरूरी है। असल भारत को जानना है तो देश के वनवासियों को जानना होगा। उनकी सांस्कृतिक विरासत को समझना होगा। वनवासियों की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का काम करते हुए उन्हें विकास की धारा से जोड़ें। एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एमडीयू जनजातीय इलाकों में एनएसएस शिविर का आयोजन करेगा। इससे विद्यार्थी वनवासियों के बारे में जान सकेंगे।
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा ने राणा कूंजा भील के योगदान की चर्चा करते हुए वनवासियों के त्याग और बलिदान को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में आजादी में वनवासियों के बलिदान पर शोध कार्य करने पर भी बल दिया।
मुख्य अतिथि पीजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल ने कहा कि जनजाति वीरों की गाथा को जानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही वनवासी वीरों के बलिदान को सामने लाया जा सकता है। मुख्य वक्ता अखिल भारतीय युवा प्रमुख, वनवासी कल्याण आश्रम वैभव सुरंगे ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में वनवासियों की विशेष भूमिका रही। तिलका माझी, बिरसा मुंडा, भीमा नायक, वीर नायक, गुड्डू भगत, सिद्दोकानो, फूलो और झानो समेत अनेक वनवासी क्रांतिकारियों के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की चर्चा। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम में वनवासी वीरों का योगदान विषय पर पुस्तक का विमोचन किया गया।
वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत उपाध्यक्ष रमेश गोयल ने कार्यक्रम की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर डाॅ. रवि प्रभात ने मंच संचालन किया। प्रो. सोनिया मलिक ने आभार प्रदर्शन किया।
इस मौके पर वनवासी कल्याण आश्रम के जिलाध्यक्ष नवीन गुप्ता, वनवासी कल्याण आश्रम उत्तर क्षेत्र के शहरी प्रभारी जयभगवान, डाॅ. सतीश मलिक, डीन, प्रो. केएस चौहान, प्रो. एनके स्वैन, प्रो. संतोष नांदल, प्रो. सुप्रीति, डाॅ. नीरजा अहलावत, शोधार्थी, विद्यार्थी, शहर के प्रबुद्धजन मौजूद रहे।