24 सीटीके 12 व 13
पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप, पुलिस का इन्कार
रोहतक। पंजाब के घायल किसान संगरूर जिले के नयागांव निवासी 30 वर्षीय प्रीतपाल सिंह को शनिवार दोपहर पीजीआई रोहतक से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। पंजाब सरकार ने बाकायदा हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर घायल को पंजाब भेजने के लिए कहा था।
किसान और दूसरे सामाजिक संगठनों की मौजूदगी में परिजन घायल को शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे लेकर रवाना हो गए। परिजनों ने प्रीतपाल सिंह को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं, पुलिस की ओर से 21 फरवरी को बयान जारी किया गया था कि पंजाब के किसान का अपहरण नहीं हुआ, बल्कि घायल हालत में पीजीआई में दाखिल कराया था। पीजीआई में उसका उपचार चल रहा है।
पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीजीआईएमएस) में 21 फरवरी से भर्ती कराए गए किसान प्रीतपाल के चचेरे भाई गुरुजीत सिंह ने बताया कि प्रीतपाल को डर था कि सरकार कुछ भी करा सकती है। जान का खतरा बना हुआ है। गुरुजीत ने बताया कि पुलिस ने प्रीतपाल पर हत्या के प्रयास की धारा 307 का केस दर्ज कर रखा है, जबकि प्रीतपाल ने कभी किसी से तेज आवाज में बातचीत नहीं की है। प्रीतपाल बच्चों को अंग्रेजी का ट्यूशन पढ़ाता है, साथ में किसान का बेटा भी है। उसकी रगों में किसान का खून है। वह किसानों के धरने पर बैठ भी नहीं सकता क्या? यह कोई जुर्म है क्या? हक की बात करना और शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठना सबसे बड़ा जुर्म हो गया। पंजाब के नयागांव निवासी प्रीतपाल सिंह (30) दो बहनों (कर्मजीत कौर व किरण कौर) के इकलौते भाई हैं। घर में मां लखबीर कौर और पिता महेंद्र सिंह खेतीबाड़ी का काम देखते हैं। कर्मजीत की शादी हो चुकी है।
जबरन उठाकर लाई पुलिस पंजाब के किसान को
सांगवान जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जगमति सांगवान का कहना है कि हरियाणा पुलिस पंजाब के किसान प्रीतपाल सिंह को जबरन उठाकर लाई है। उसे टाॅर्चर भी किया गया। उसके जबड़े व पैरों पर चोटों के निशान हैं। उसे अचेत हालत में पीजीआई में दाखिल किया गया। शनिवार को बलदेव सिंह सिरसा चंडीगढ़ से रोहतक आए और संगठनों के साझे प्रयास से प्रीतपाल को चंडीगढ़ भिजवाया। इस मौके पर डाॅ. धर्मवीर राठी, प्रीत सिंह, एडवोकेट रामचंद्र सिवाच, विरेंद्र मलिक, विनोद गिल, मनोज सहरावत, गीता अहलावत, विरेंद्र हुड्डा, ममता कादयान, एडवोकेट गुरु प्रसाद व किसान आंदोलन और सामाजिक संगठनों के नेता भी मौजूद रहे।