डेंगू का डंक आमजन की नींद उड़ा रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है। एक के बाद एक डेंगू के कई मामले सामने आ रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य अधिकारी डेंगू की दस्तक मानने को तैयार ही नहीं।
मंगलवार को विकास नगर की एक गली में एक महिला डॉक्टर, प्रिंसिपल सहित तीन बच्चे डेंगू पॉजिटिव मिले हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले से अंजान है। हैरानी की बात है कि नियमों के तहत स्वास्थ्य विभाग को इन मरीजों की सबसे पहले जानकारी होनी चाहिए।
एक गली में डेंगू के पांच मरीजों का एक साथ सामने आना भले ही लोगों को भयभीत कर रहा हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि वह निजी अस्पताल में बताए गए पॉजिटिव को नहीं मानता। इसके लिए मरीजों को पीजीआई में जाकर जांच करवानी चाहिए। निजी अस्पताल में जिस विधि से जांच होती है वह उपयुक्त नहीं है। हैरानी की बात है कि विभाग सरकारी डॉक्टरों और सरकारी कर्मचारियों के मामले में भी ढिलाई बरत रहा है, ऐसे में आमजन के लिए क्या व्यवस्था होगी, यह अनुमान लगाया जा सकता है।
विकास नगर निवासी और पीजीआई में तैनात स्त्री रोग विभाग की डॉ. सोनिका मान, सरकारी आईटीआई के प्रिंसिपल जीतपाल, तरंग गोयल, भाविका गोयल और वंश वर्मा एक ही गली में रहते हैं। प्राइवेट लैब में हुई जांच में सभी को डेंगू मिला है।
शिक्षित वर्ग ज्यादा चपेट में
सफाई का पाठ पढ़ा रहे विभाग के लिए सवाल उठ रहा है कि डेंगू की चपेट में अधिकांश लोग शिक्षित वर्ग से हैं। अभी तक जितने मामले सामने आए हैं सभी पढ़े-लिखे परिवार से संबंध रखते हैं।
कर्मचारी बोले- मशीन खराब
स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि वह डेंगू के मरीजों की पुष्टि होने पर और संदिग्ध पाए जाने पर संबंधित क्षेत्र में फोगिंग करवाई जाती है। विकास नगर के लोगों का कहना है कि उन्होंने जब फोगिंग के लिए आग्रह किया तो विभाग की एक महिला ने बताया कि अभी फोगिंग गन ही खराब है। जबकि दूसरे कर्मचारी ने बताया कि पांच में से चार मशीन सही हैं। कर्मचारी कम होने के कारण फोगिंग नहीं हो पा रही है। इससे उलट, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. वेदपाल दलाल की मानें तो उनके पास पांचों फोगिंग गन सही हैं और इसके लिए उनके पास छह का स्टाफ, पांच सहायक और एक एचआई है। कलानौर, रोहतक और किलोई हलके के कई गांवों में फोगिंग कराई जा रही है।
निजी अस्पताल को भी देनी है सूचना
निजी अस्पतालों को डेंगू के मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को न देना भारी पड़ सकता है। डीएमओ डॉ. वेदपाल दलाल ने बताया कि ऐसा नहीं करने पर संबंधित अस्पताल का पंजीकरण रद किया जा सकता है। इस संबंध में नोटिस पहले ही जारी कर दिए गए हैं।
पीजीआई के भरोसे ही चल रहे हैं सूबे के मरीज
स्वास्थ्य विभाग डेंगू के मामले में पीजीआई रोहतक और चंडीगढ़ के ही भरोसे है। मरीज को जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स यहीं से उपलब्ध हो सकती हैं।
बोले अधिकारी
डेंगू के डंक की सही जांच किट पीजीआई और सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध है। निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट को हम सही नहीं मान सकते। निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी बनती है कि वह पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों की पूरी जानकारी हमें उपलब्ध कराएं। जहां डेंगू के या संभावित मरीज मिले हैं वहां जल्द ही फोगिंग करवा दी जाएगी।
- डॉ. शिव कुमार, सिविल सर्जन।