प्रदेश के एक मात्र डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसन (डीएसएम) ने बुधवार को अपना पहला सफल ऑपरेशन किया है। इसमें विभाग की एक्सपर्ट टीम ने महिला जूडो खिलाड़ी को कंधा उतरने की समस्या से निजात दिलाई है। डॉक्टरों का दावा है कि खिलाड़ी पांच माह बाद फिर से खेल में हिस्सा ले सकेंगी। महिला खिलाड़ी को वार्ड-26 के स्पेशल वार्ड में शिफ्ट किया गया है।
खिलाड़ियों को शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसन (डीएसएम) ने अपनी कामयाबी का खाता खोल दिया है। विभाग के एक्सपर्ट आने वाले समय में ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन थियेटर के अलावा खेल नर्सरी व मैदानों में जाकर भी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएंगे। विभाग की टीम खिलाड़ियों का डाइट प्लान तैयार कर उनकी काउंसिलिंग भी करेगी और उन्हें खेल के मैदान में मानसिक रूप से मजबूत बनाएगी। विभाग छोटे से बड़े स्तर के खिलाड़ियों को हर प्रकार का उपचार देगा।
पीजीआईएमएस के डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसन ने अपना पहला ऑपरेशन कर दिया है। भविष्य में यहां खिलाड़ियों का उपचार ही नहीं, एक खिलाड़ी को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार भी किया जाएगा। इसके लिए एक्सपर्ट की टीम खिलाड़ियों के संपर्क में रहेगी और विभाग की ओर से दी जा रही सुविधाओं के बारे में बताएगी।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
स्पोर्ट्स मेडिसन विभाग बनने से पहले का रिकॉर्ड
दाखिल मरीज लगभग 100
ऑपरेशन लगभग 90
ओपीडी लगभग 800
नोट : यह आंकड़ा डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसन शुरू होने से पहले का है। पहले यह यूनिट स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के रूप में काम कर रही थी। इसे बाद अलग विभाग बनाते हुए यहां खिलाड़ियों को कई सुविधाएं मिलेंगी।
लाखों रुपये खर्च करने के बाद मिलीं सुविधाएं
उपकरण संख्या कीमत
ओटी टेबल एक 30 लाख
ओटी लाइट एक छह लाख
सी आर्म इमेज इंटेंसिफायर एक 40 लाख
ऑर्थोस्कोपी सेट दो 95 लाख
सीपीएम मशीन चार तीन लाख
शोल्डर व्हील सेट दो 2.5 लाख
एंकल एक्सरसाइजर दो 1.5 लाख
क्वाड्रीसेप टेबल दो दो लाख
आर्म एंड रिस्ट एक्सरसाइजर एक एक लाख
थरबेंड एंड वेट सेट एक 50 हजार
एक्सरसाइजर बॉल दो 40 हजार
शार्ट वेव डायाथरमे एक 75 हजार
खींचतान अभी भी जारी
सूत्रों के अनुसार 20 नवंबर को डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसन का विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश रोहिल्ला को नियुक्त कर दिया गया है। लेकिन अभी भी इस विभाग के लिए कुछ डॉक्टर प्रयासरत हैं। हालांकि इनका नाम पहले इस दौड़ में शामिल था और उन्होंने इसे शुरू करवाने में अपना योगदान भी दिया। लेकिन मौके पर उन्होंने ऑर्थो विभाग को चार्ज छोड़ने से मना कर दिया। इसके बाद डॉ. रोहिल्ला ने यह जिम्मेदारी उठाई और उनको प्रशासन ने यह जिम्मेदारी दे दी। डॉ. राजेश रोहिल्ला भी इस प्रोजेेक्ट की शुरुआत से जुडे़ रहे हैं। इस विभाग की एवज में उनको पदोन्नति दी गई थी।
कुछ ही डॉक्टर व स्टाफ हैं स्पोर्ट्स एक्सपर्ट
देश में स्पोर्ट्स एक्सपर्ट की कमी के चलते इस विभाग में आर्थो विभाग के डॉक्टर ही मरीजों का उपचार करेंगे। हालांकि अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर एक डॉक्टर स्पोर्ट्स एक्सपर्ट यहां उपलब्ध है। इसके अलावा यहां फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशियनिस्ट स्पोर्ट्स से एक्सपर्ट यहां मौजूद हैं। संस्थान के पूर्व ऑर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. एनके मग्गू के अनुसार स्पोर्ट्स मेडिसन अभी शुरू हो रहा है। इसके चलते इसमें एक्सपर्ट की कमी है। लेकिन ऑर्थो विभाग के डॉक्टर खिलाड़ियों का उपचार करते आ रहे हैैं। अब यह कोर्स शुरू होने पर देश में एक्सपर्ट डॉक्टरों की भी कमी नहीं रहेगी।