रोहतक। क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले लिपिकों की हड़ताल वीरवार को लघु सचिवालय के बाहर 16वें दिन भी जारी रही। कर्मचारी बाहर नारेबाजी करते रहे और अंदर कार्यालयों में मेज पर फाइलें धूल फांकती रहीं।
भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी की चल रही हड़ताल की अध्यक्षता जिला प्रधान सुभाष पांचाल ने की। इसमें जिला कमेटी द्वारा संयुक्त फैसला लिया गया कि मंच का संचालन हर दिन दो विभागों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। वीरवार को मंच संचालन डीसी कार्यालय तथा पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों द्वारा किया गया। इसमें बताया गया कि लिपिकों की हड़ताल से सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित है। सरकार द्वारा लिपिकों की जगह कच्चे कर्मचारियों से काम करवाने की नीति भी कारगर साबित नहीं हुई। धरने में हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान जोगेंद्र बलहारा, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव जयकिशन दलाल, स्टेट प्रधान महिला निर्मल हुड्डा, स्टेट चेयरमैन जलकरण बलहारा, स्टेट प्रेस सचिव सतबीर सहरावत ने धरने में शिरकत की। इसमें रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने लिपिकों की एकमात्र जायज मांग 35400 को सही बताया और उनको समर्थन दिया।
‘19990 में होता नहीं गुजारा 35400 हक हमारा’
जिला प्रधान सुभाष पांचाल द्वारा लिखी गई ‘19990 में होता नहीं गुजारा 35400 हक हमारा’ रागिनी को राधेश्याम सैनी, रिटायर्ड अकांउट क्लर्क ने मंच से सुनाया। इसमें लिपिकों की मजबूरी को बयां करते हुए सरकार को चेताने की कोशिश की गई की उनकी मांग जायज है।
सीएम के ओएसडी ने मुलाकात कराने को किया ट्वीट, नहीं माने हड़ताली
सीएम के ओएसडी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी को मुख्यमंत्री से शुक्रवार दोपहर 12 बजे बातचीत के लिए बुलाया है। इस पर लिपिकीय वर्ग का कहना है कि जब तक सरकार उनकी 35400 की मांग पूरी नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। आने वाले समय में सरकार की दिक्कतें और बढ़ने वाली हैं।
सभी पोर्टल बंद, काम हो रहे प्रभावित
हड़ताली कर्मचारियों ने बताया कि लिपिकों की हड़ताल से पोर्टल वाली सरकार के सभी पोर्टल बंद हैं। ऑनलाइन व ऑफलाइन काम पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। हर दिन करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सभी प्रकार की रजिस्टरी, ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ अन्य सभी सरकारी काम काज पूरी तरह ठप हैं। जनता सरकारी कार्यालयों से खाली हाथ लौट रही है। सरकार न तो लिपिकों और न ही जनता की परेशानियों को समझ रही है।