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महिला रजिस्ट्री क्लर्क को पांच साल की कैद

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एसबीआई बैंक की फर्जी मोहर बनाकर सरकारी खजाने से 47 लाख का गबन करने की आरोपी सांपला तहसील की रजिस्ट्री क्लर्क मंजू यादव को अदालत ने दोषी करार दिया है। एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने मंगलवार को रजिस्ट्री क्लर्क को 5 साल की कैद व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि उसके पति अजय शर्मा को मामले से एक दिन पहले कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी।
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मामले के अनुसार सांपला के तत्कालीन तहसीलदार सुभाष ने थाने में शिकायत दी कि मंजू यादव तहसील में रजिस्ट्री क्लर्क है, जिसने बैंक की फर्जी मोहर बना रखी है। खुद यह बात उसने नायब तहसीलदार के सामने कुबूल की है। मंजू का कहना है कि उसके बहनोई का कारोबार घाटे में चल रहा है। वह गबन की करीब 20 लाख राशि उसे दे चुकी है। हालांकि तहसीलदार ने साफ किया कि जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि रजिस्ट्री क्लर्क ने कितनी राशि का गबन किया है। सांपला पुलिस ने मंजू यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच की जिम्मेदारी डीएसपी डिटेक्टिव को दी गई। डीएसपी की टीम ने जांच के दौरान रजिस्ट्री क्लर्क की प्रॉपर्टी से लेकर घर के कीमती सामान और अकाउंट की डिटेल निकाली। साथ ही तहसील की कैश की कॉपी बरामद की गई। जांच में पता चला कि 12 अक्तूबर 2015 से 17 जुलाई 2017 तक की रजिस्ट्रेशन फीस व चस्पा फीस सरकारी खजाने में नहीं जमा करवाई गई और 47 लाख के करीब राशि का गबन हुआ है। पुलिस ने मंजू यादव से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व स्टेट बैंक ऑफ पटियाला लघु सचिवालय की फर्जी मोहर बरामद हुई। साथ ही पुलिस ने उसके पति अजय शर्मा से भी 1 लाख 30 हजार रुपये की राशि बरामद की। तभी से जिला अदालत में दोनों के खिलाफ केस चल रहा था, लेकिन सोमवार को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने अजय को साक्ष्यों के अभाव में निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। जबकि मंजू यादव को दोषी करार देते हुए आईपीसी की धारा 467 के तहत एक साल की कैद व एक हजार रुपये जुर्माना, 471 के तहत 1 साल की कैद और भ्रष्टाचार अधिनियम 13 के तहत 5 साल की कैद व 5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
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