रोहतक। प्रदेश का जूता उद्योग देश में नई पहचान बनाएगा। एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट सेंटर) जूता उद्योग को नई ऊंचाई देने में मील का पत्थर साबित होगा। इसके लिए एफडीडीआई में स्थापित हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्पोर्ट्स शूज (नॉन लेदर) में आधुनिक लैब स्थापित की गई है। जूता उद्यमियों को जूते के डिजाइन, मजबूती, उम्र सहित कई महत्वपूर्ण जानकारी के साथ अपनी स्वीकृति भी देगा। इस मंजूरी के बगैर उद्यमी कंपनी में उत्पादन शुरू नहीं कर पाएंगे। संस्थान की लैब में जूता निर्माण में प्रयोग होने वाले पदार्थ की गुणवत्ता जांच की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलने से बहादुरगढ़ के 2500 से अधिक जूता उद्यमियों व उद्योग को रफ्तार मिलेगी, साथ ही उद्यमियों को जूते के डिजाइन के लिए अब नोएडा भी नहीं जाना होगा। नई व्यवस्था से संस्थान को भी रेवेन्यू प्राप्त होगा। शुल्क अभी तय नहीं किया गया है।
लैब में तैयार होंगे जूतों के सोल
संस्थान में पॉलीमर लैब विशेष रूप से तैयार की गई है। यहां जूतों के सोल बनाए जाएंगे। इसमें रबड़, पीपीआर, पीवीसी व ईवा पदार्थ शामिल हैं। मिटिंग लैब में मशीन से अलग-अलग रंगों के ऊपर सोल तैयार किए जाएंगे। जूते के ये ऊपरी हिस्से एक से ज्यादा रंग में भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा सोल डिजाइन की सुविधा भी रहेगी।
जान सकेंगे कितना मजबूत होगा जूता
जूता उत्पादक बाजार में अपना उत्पाद उतारने से पूर्व उसके गुण-दोष अच्छे ढंग से जान सकेंगे। इस काम में एक्सीलेंस सेंटर की टेस्टिंग लैब मदद करेगी। लैब में जूता कितने समय चलेगा, इसका साेल कितना मजबूत होगा। कितने समय बाद इसमें क्रैक आएगा, जूते की उम्र कितनी होगी, यह पता लगाना संभव है। इससे उत्पादक को नुकसान नहीं होगा। बाजार में भी माल की डिमांड उसी अनुरूप बन सकेगी।
एफडीडीआई परिसर में विदेश से खास तरह के उपकरण भी लाए गए हैं। यह अपनी तरह की बड़ी सुविधा है। इसका लाभ बहादुरगढ़ के 2500 से अधिक जूता उद्यमियों के अलावा प्रदेश भर के जूता कारोबारी उठा सकेंगे। यही नहीं, इस नई व्यवस्था से आने वाले दो से तीन वर्ष में रोहतक जूता उद्योग के नए हब के रूप में विकसित होगा। वहीं संस्थान के कुशल विद्यार्थियों व अन्य युवाओं को भी रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
-संदीप बैनीवाल, प्रवक्ता, एफडीडीआई, रोहतक
संस्थान नई ऊंचाई छूने की ओर कदम बढ़ा रहा है। यहां एक्सीलेंस सेंटर बनने से जूता उद्योग व रोहतक भी नई पहचान बनाएगा। कैंपस में स्थापित लैब में आई आधुनिक मशीनों से जूते की गुणवत्ता, उसकी उम्र, मजबूती, केमिकल संबंधी सारी जानकारी स्थानीय स्तर पर ही प्राप्त हो सकेंगी। इससे उत्पादकों का समय व ऊर्जा बचेगी। संस्थान को भी आर्थिक लाभ होगा, साथ ही विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
-श्याम कटियार, प्रभारी, एफडीडीआई, रोहतक