एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा हुआ है। संस्थान ने न केवल यूजीसी की बिना अनुमति के मेवाड़ यूनिवर्सिटी से एमओयू किया, बल्कि जून 2015 में मेवाड़ यूनिवर्सिटी में हुए एग्रीमेंट के बाद भी संस्थान में क्लास चलाई गईं।
यही नहीं, संस्थान के कैंपस में ही छात्रों के पेपर भी कराए गए, जो नियमानुसार यूनिवर्सिटी के मुख्य कैंपस में ही होने चाहिए थे। मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन की तरफ से 30 जून को एक पत्र यूजीसी को भेजा गया।
इसमें उन्होंने जिक्र किया कि यूनिवर्सिटी से संबद्ध संस्थानों की 29 जून 2015 को मीटिंग हुई है, जिसमें एफडीडीआई के अधिकारी भी शामिल हुए हैं। मीटिंग में एग्रीमेंट हुआ कि यूनिवर्सिटी से संबद्ध संस्थानों में केवल ट्रेनिंग, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के संबंधित कार्य होंगे।
इसके अलावा एकेडमिक कार्य और छात्रों के पेपर यूनिवर्सिटी के मुख्य कैंपस में ही कराए जाएंगे। इस पत्र के बाद 14 अक्तूबर को यूजीसी ने भी मेवाड़ यूनिवर्सिटी को पत्र भेजा। इसमें उन्हें आदेश दिए गए हैं कि यूनिवर्सिटी केवल उन्हें ही डिग्री देगी, जो रेग्युलर मोड में वहीं के कैंपस में पढ़ते हैं।
यह उठ रहे हैं सवाल
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ हुए एग्रीमेंट और यूजीसी के आदेशों को देखें तो एफडीडीआई इनकी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। सवाल यह है कि संस्थान में किस आधार पर क्लास चलाई गई। यूजीसी ने आदेश दे दिए थे कि यूनिवर्सिटी केवल उन्हीं छात्रों को डिग्री दे सकती है जो मुख्य कैंपस में पढ़ाई करते हैं।
मामला कोर्ट में है
यह पूरा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट के निर्णय के बाद ही इस मुद्दे पर कुछ कहा जा सकता है। वैसे भी एग्रीमेंट और प्रबंधन से संबंधित सारे निर्णय नोयडा स्थिति मुख्य कार्यालय में लिए जाते हैं।
मनोज अग्रवाल, सेंटर प्रभारी, एफडीडीआई रोहतक।