एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट) में डिग्री को लेकर एक बार फिर तकरार शुरू हो गई है।
विद्यार्थियों और प्रबंधन के बीच डिग्री को लेकर चले आ रहे विवाद में सोमवार को विद्यार्थियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया।
विद्यार्थियों ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ से मिलने वाली डिग्री पर सवाल उठा दिए हैं।
उनका कहना है कि 15 लाख रुपये फीस देने के बाद किसी ओपन यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं लेंगे। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि डिग्री वैध ही दी जाएगी। वहीं विद्यार्थियों ने 15 सितंबर को जंतर मंतर पर धरना देने की घोषणा की है।
एफडीडीआई की डिर्ग्री को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पांच माह से डिग्री को लेकर असमंजस की स्थिति है। लगातार विद्यार्थियों के प्रदर्शनों और प्रबंधन केआश्वासनों केबीच अब मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री को लेकर सवाल पैदा हो गए हैं।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में है और यह प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। यूजीसी के नार्म्स के मुताबिक कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी राज्य से बाहर स्टडी सेंटर नहीं खोल सकती और न ही डिग्री दे सकती है। ऐसे में एफडीडीआई के विद्यार्थियों ने सवाल उठाया है कि उन्हें जो डिग्री दी जाएगी वह वैध कैसे होगी? इधर प्रबंधन ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी केबजाय इग्नू से डिग्री दिलाने की बात कही थी लेकिन, वद्यार्थियों ने इनकार कर दिया है। विद्यार्थियों का कहना है कि 15-15 लाख रुपये फीस देने के बाद ओपन यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं लेंगे।
पहले हंगामा फिर हड़ताल
सोमवार को विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। विद्यार्थियों ने नारेबाजी करते हुए हड़ताल का ऐलान कर दिया। विद्यार्थियों ने यह आरोप भी लगाया कि प्रबंधन की ओर से धमकी दी जा रही है कि यदि इस मामले में आवाज उठाई तो उन्हें फेल कर दिया जाएगा।
भरोसा नहीं दिला पा रहा है प्रबंधन
विद्यार्थियों की नाराजगी को किसी भी तरह से प्रबंधन दूर नहीं कर पा रहा है। शिवानी, संदीप, आदित्य सहित अन्य विद्यार्थी ने बताया कि आरटीआई लगाकर भी जवाब मांग चुके हैं। जिसमें सह साफ कहा गया है कि उन्हें जो डिग्री दी जाएगी वह वैध नहीं होगी। हालांकि प्रबंधन का अभी भी दावा है कि वैध डिग्री ही दी जाएगी। एफडीडीआई केमैनेजर अतुल अस्थाना के मुताबिक डिग्री को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं है। प्रबंधन ने माना कि डिग्री को लेकर एक बार फिर इग्नू से भी बातचीत चल रही है। प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों में डिग्री को लेकर गलतफहमी पैदा हो गई है।