बच्चे बोल नहीं सकते। कोरोना से होने वाली दिक्कत बता नहीं सकते। स्वाद व गंध के बारे में बात कर नहीं सकते। ऐसे में कोरोना संक्रमित बच्चे के माता-पिता को सतत निगरानी करनी होगी। बच्चे की सांस तेज हो जाए, पसली चलने लगे, मां का दूध पीना कम कर दे, तो तुरंत अस्पताल लेकर आना होगा। ये लक्षण बच्चे में तभी आएंगे जब फेफड़े तक संक्रमण पहुंचेगा अथवा ऑक्सीजन स्तर कम होगा।
कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चों के संक्रमित होने की आशंका विशेषज्ञ डॉक्टर जता रहे हैं। इसको लेकर केंद्र व राज्य सरकार हरसंभव तैयारी में जुटा है। हर बच्चे को समय पर उपचार देने की सुविधाएं तेजी से स्थापित की जा रही है। ऐसे में बच्चों का जीवन सुरक्षित रखने के प्रति माता-पिता और परिजनों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा जब भी बीमार होता है, तो व्यवहार बदल जाता है। बच्चा सुस्त रहने लगता है। जिस खिलौने से खेलता है, उसके प्रति रुचि नहीं दिखाता। पल-पल बिलखकर रोने लगता है। इन लक्षणों से माताएं अथवा परिवार की बुजुर्ग महिलाएं बच्चे के बीमार होने का पता लगा लेती हैं। ठीक इसी तरह से बच्चे के कोरोना संक्रमित होने के बाद माताओं अथवा परिजनों को नजर रखनी होगी ताकि कोरोना के घातक होने पर समय से उपचार दिलवाया जा सके। माताओं और परिजनोें की लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। पीजीआईएमएस की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता गठवाला ने बताया कि कोरोना संक्रमित बच्चा परेशानी के बारे में बता नहीं सकता। इसलिए बच्चे पर माताओं अथवा परिजनों को सतत नजर रखनी ही होगी। बच्चे को तेज बुखार आने, सांस तेजी से चलने लगे, मां का दूध कम कर दे, पसलियां चलने लगे तो तुरंत बच्चे को अस्पताल लेकर जाना होगा। बच्चों में ये लक्षण ऑक्सीजन लेकर कम होने अथवा फेफड़ों में संक्रमण होने पर सामने आते हैं। फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने पर बच्चा मां का दूध पीना कम कर देता है।
ऑक्सीजन लेवल मापते रहे, 95 से कम होने पर डॉक्टर को दिखाएं
डॉ. गीता गठवाला बताती हैं कोरोना संक्रमित बच्चे का ऑक्सीजन लेवल मापते रहना होगा। 95 से ज्यादा का मतलब कोई चिंता नहीं। 94 लेवल होते ही सतर्क हों और डॉक्टर से परामर्श लें। थोड़ा भी लेवल कम हो तो तुरंत भर्ती करवाएं। बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों का ऑक्सीजन लेवल मापने का कोई अलग से ऑक्सीमीटर नहीं आता है। लोग भ्रम नहीं पाले और सामान्य ऑक्सीमीटर का ही प्रयोग करें।
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रति माताओं और परिजनों का खास सतर्कता बरतनी होगी। बच्चे को बाहर न जाने दें और न खेलने दें। यदि बच्चा कोरोना संक्रमित हो भी जाता है, तो उस पर खास नजर रखें। तेज बुखार, सांस का तेज होना, पसलियां चलने, दस्त लगने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाएं। बच्चे का समय-समय पर ऑक्सीजन लेवल भी मापते रहे ताकि समय रहते खतरे से बचा जा सके।
- डॉ. गीता गठवाला, बाल रोग विशेषज्ञ, पीजीआईएमएस, रोहतक