मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल में आने वाली तकनीकी खामियों का खामियाजा किसानों का भुगतना पड़ रहा है। वे मार्केट कमेटी से लेकर उप निदेशक कृषि कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
बालंद से गेहूं बेचने के लिए रोहतक आए जयवीर को गेट पास जारी नहीं हो रहा है। उन्होंने अपने पांच एकड़ गेहूं का मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया था। उसके सारे कागजात भी उनके पास हैं। जब वह गेट पास बनवाने पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि उनका रिकॉर्ड पोर्टल पर नहीं दिख रहा है, इसलिए उन्हें गेट पास जारी नहीं किया जा सकता है। उसके कहने पर वह किसान सहायता केंद्र गए, लेकिन वहां भी कोई समाधान नहीं हुआ। इसी तरह मुंगान गांव के संदीप भी किसान सहायता केंद्र के बाहर परेशान हालत में घूम रहे थे। उन्होंने अपने करीब 135 क्विंटल गेहूं का रजिस्ट्रेशन मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाया था। उनको मैसेज आया कि उन्हें आठ अप्रैल को अपनी फसल बेचने मंडी जाना है। लेकिन तब तक फसल कटी नहीं थी। संदीप सीएससी में जाकर तारीख बदलवा ली। लेकिन सीएससी वाले ने उनकी मंडी और जिला भी बदल दिया। उन्हें रोहतक की किलोई मंडी में फसल बेचनी थी। उसने सोनीपत जिले की खरखौदा मंडी भर दी। वह फसल बेचने जा रहे थे तो पता चला कि वहां आढ़तियों ने हड़ताल कर दी है, दो दिन तक कोई ट्रॉली मंडी में नहीं जा सकती। वह किसान सहायता केंद्र आए तो बताया गया कि फसल यहां नहीं बिक सकती। वह वेबसाइट पर जाकर अपनी मंडी में बदलाव करें। संदीप ने अपने स्मार्ट फोन में वेबसाइट खोली तो वहां मंडी बदलने का विकल्प अब नहीं था, जबकि पहले वह ऑप्शन दिख रहा था। बहुत से किसान ऐसे थे, जिनको रजिस्ट्रेशन के बाद भी फसल बेचने के संबंध में मैसेज नहीं आया। उन्हें बताया गया कि अगर किसी का ज्वाइंट अकाउंट है तो उसके साथ यह दिक्कत आ रही है। उसे ठीक करवाने के लिए उन्हें उप निदेशक कृषि के कार्यालय में जाना होगा।
हमारी मंडी में जो भी फसल आएगी, उसे खरीदा जाएगा, बशर्ते रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। अगर कोई किसी खास मंडी में फसल बेचना चाहता है तो मंडी बदलने का विकल्प है। ज्वाइंट अकाउंट वालों की समस्या कृषि विभाग हल कर रहा है।
- देवेंद्र ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी