चरखी दादरी। प्रदेश के आठ जिलों से गुजरने वाले केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी परियोजना ग्रीन कॉरिडोर (एनएच-152 डी) निर्माण की अड़चनों को दूर करने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की बैठक के बाद केंद्र सरकार के रुख को देखते हुए जिला प्रशासन ने खातीवास के किसानों को बुलाया और गांव की 70 एकड़ जमीन अधिग्रहण को लेकर बातचीत की। किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि 45 लाख की जगह सरकार दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि दे तो किसान जमीन देने को तुरंत तैयार हैं। अब अधिकारियों ने डीसी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
बता दें कि नेशनल हाइवे- 152 डी के निर्माण के लिए जिले के 18 गांवों की जमीन अधिगृहीत की जानी है। 17 गांव तो मुआवजा राशि लेकर जमीन दे चुके हैं, जबकि खातीवास के किसान 18 लाख प्रति एकड़ मार्केट वेल्यू और 45 लाख मुआवजा राशि पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने करीब एक साल पहले मुआवजा राशि लेने से इंकार दिया था। दो बार जमीन पर कब्जा लेने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के विरोध के चलते लौटना पड़ा। इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के सात हजार से अधिक किसानों की 576 एकड़ जमीन अधिगृहीत की जानी है। इसमें से 506 एकड़ अधिगृहीत की जा चुकी है, जबकि करीब 70 एकड़ पर लंबे समय से पेच फंसा है। यह 70 एकड़ जमीन खातीवास के 439 किसानों की है।
तीन दिन पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की इस परियोजना को लेकर बातचीत भी हुई है, जिसमें केंद्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। इस बैठक के बाद खातीवास के किसानों में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। किसानों का मानना है कि केंद्र सरकार ने तो हरी झंडी दे दी है और किसानों को अब रिवाइज मुआवजा दिलाकर प्रोजेक्ट की अड़चने दूर करने की गेंद अब प्रदेश सरकार के पाले में है। प्रशासन को रिवाइज मुआवजा राशि का प्रपोजल तैयार कर प्रदेश सरकार की मार्फत केंद्र सरकार के पास भेजना चाहिए।
डीआरओ ने पहले नंबरदारों की ली बैठक, फिर किसानों को बुलाया
सूत्रों के अनुसार सीएम और केंद्रीय मंत्री की बैठक के बाद दादरी डीआरओ ने पहले नंबरदारों की बैठक ली और इसके अगले दिन खातीवास के किसानों को बुलाया। किसानों के साथ हुई बैठक में एसडीएम विरेंद्र सिंह और सिटीएम भी मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि कानूनी रूप से उनकी मुआवजा राशि दो करोड़ से अधिक बनती है, लेकिन किसान केवल दो करोड़ रुपये ही मांग रहे हैं। किसानों को अधिकारियों ने डीसी के समक्ष उनकी बात रखने का आश्वासन दिया।
इन जिलों से होकर गुजरेगा एनएच-152 डी
230 किलोमीटर लंबा एनएच-152 डी नारनौल के गंगहेडी से कुरुक्षेत्र के इस्माइलाबाद तक बनना है। यह परियोजना महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, जींद, कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल से होकर गुजरेगी।
720 दिनों तक धरने पर बैठे थे किसान, पांच की हुई थी मौत
18 गांवों के किसानों ने रामनगर में मुआवजा राशि बढ़वाने की मांग को लेकर 14 माह तक लगातार धरना दिया था। हालांकि करीब दस माह बाद किसान दो गुटों में बंट गए थे और दूसरे गुट ने ढाणी फौगाट में धरना शुरू कर दिया था। 720 दिन से अधिक समय किसानों ने लगातार धरना दिया और उस दौरान धरनास्थल पर पांच किसानों की मौत भी हुई थी।
अब गेंद प्रदेश सरकार के पाले में : अनूप सिंह
खातीवास धरना संयोजक समिति प्रधान अनूप फौगाट ने बताया कि केंद्र सरकार हर मांग को पूरी करने के लिए तैयार है और अब गेंद प्रदेश सरकार के पाले में है। किसान भी इस महत्वकांक्षी परियोजना में रोड़ा नहीं अटकाना चाहते, बशर्ते सरकार दो करोड़ रुपये उन्हें मुआवजा राशि दे। हमारे गांव में 439 किसानों की 70 एकड़ जमीन अधिगृहीत होनी है। डीआरओ, एसडीएम और सिटीएम के समक्ष हमने हमारा पक्ष रख दिया। हमने प्रशासन के समक्ष आर्बिटेशन (मामले को लेकर न्यायालय में जाना) में जाने से इंकार कर दिया।
एसडीएम और सिटीएम की मौजूदगी में हमने खातीवास के किसानों की कमेटी को बातचीत के लिए बुलाया था। जल्द से जल्द पेच को सुलझाने का प्रयास है। हमने डीसी को स्थिति से अवगत करवाया दिया है।
सतीश कुमार, डीआरओ