Farmer's crop does not sell, is robbed: Rakesh Tikait
किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि तीनों कृषि कानून किसान और कृषि को बर्बाद करने वाले हैं। किसान की फसल बिकती नहीं है, लूटी जाती है। अब आगे किसान को पूरी तरह से भूमिहीन करने का षड्यंत्र है। राकेश टिकैत बुधवार को महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर आयोजित एक महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। पंचायत की अध्यक्षता अनिल नंादल ने की।
उन्होंने कहा कि देश के 26 सरकारी संस्थान बेच दिए गए हैं। अभी और भी ऐसे कानून आ रहे हैं, जो गरीब और मजदूर के विरोधी हैं। सरकार चाहती है कि किसान अपनी जमीन छोड़ कर चला जाए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तो आपका दस साल पुराना ट्रैक्टर भी नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को किसान आंदोलन को खत्म करने की सरकार की एक बड़ी साजिश थी, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को छोटे-बड़े किसान तथा राज्यों के किसान के नाम पर आंदोलन को बांटने की कोशिश की, लेकिन यह और अधिक मजबूत होता गया। उन्होंने विधायक बलराज कुन्डू के मामले में कहा कि यदि सरकार भविष्य में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो उसे इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को 26 मार्च का बंद सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर आयोजित बंद में सभी लोग बढ़चढ़ कर भाग लें। उन्होंने कहा कि महम चौबीसी का ऐतिहासिक चबूतरा देश में बड़े आंदोलनों का गवाह बनता रहा है। वे कई बार अपने पिता के साथ यहां आ चुके हैं।
आयोजन समिति की ओर से भारतीय किसान यूनियन नेता अनिल नांदल ने कहा कि पंचायत का उद्देश्य 26 मार्च को बंद को सफल बनाने के लिए अपील करना तथा विधायक बलराज कुन्डू पर आयकर की कार्रवाई का विरोध करना था। इस अवसर पर कई किसान नेता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग की।