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ट्रैक्टर मार्च को लेकर रोहद टोल पर किसानों का ठहराव

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रोहतक। कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए सोमवार को किसानों का काफिला दिल्ली की ओर रवाना हुआ। यही नहीं सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर व उन पर सवार हिसार, जींद, फतेहाबाद, रोहतक व अन्य जिलों के किसानों ने रोहद टोल पर रात्रि ठहराव किया। यहां वे मंगलवार अल सुबह दिल्ली कूच करेंगे। टीकरी बार्डर तक इस 50 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर दस पर सोमवार को सूर्योदय से लेकर देर शाम तक ट्रैक्टरों की कतारें नजर आई।
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व्यवस्थित ढंग से चले वाहन
आंदोलन में शामिल होने के लिए हाइवे पर वाहनों खासकर ट्रैक्टरों का अवागमन बना रहा। ट्रैफिक के बावजूद वाहन बेहद व्यवस्थित ढंग से चले। इसके लिए किसान नेताओं ने कुछ गांवों को पहले निकाला तो कुछ को बाद में रवानगी दी। सड़क पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने केे लेकर रोहद टोल पर प्रदेश के कई जिलों के किसानों को रात्रि ठहराव कराया। किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने बताया कि रोहद टोल पर धरना जारी है। यहीं प्रदेश के अनेक जिलों के किसान भी ठहरे हैं। यहां से ट्रैक्टर सवार मंगलवार सुबह दिल्ली कूच करेंगे। यह सब व्यवस्था बनाने के लिए किया गया है।
महिलाओं ने मिलकर बनाया खाना
बहादुरगढ़ के पकौड़ा चौक के पास हाइवे पर जमे किसानों के दलों में दोपहर बाद ही शाम के खाने को लेकर हलचल शुरू हो गई। कहीं शाम की चाय चल रही थी तो कहीं खाने की तैयारी को लेकर हाथ बंटाया जा रहा था। महिलाओं का एक दल तेजी से रोटियां बनाकर शाम का खाना तैयार करने में जुटा नजर आया।
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शाम को दूध के लिए लगी कतार
आंदोलनरत किसानों के शिविरों में हर शाम नि:शुल्क दूध की सप्लाई होती है। इसके लिए दुग्ध वाहन वहां लोगों को दूध देने पहुंचता है। सोमवार शाम को दूध के लिए लोग एक लंबी कतार में खड़े नजर आए। हाथों में बाल्टियां, बड़ी देगची व अन्य बर्तन लेकर लोग वाहन की राह देखते रहे।
खुद को फिट बनाने को खेल रहे वालीबाल
आंदोलनकारी किसानों के शिविर में यूं तो हर चीज है। इसमें खाना, दवा की ही नहीं बल्कि खेल की सुविधा भी है। सोमवार को अपने शिविरों के युवा वालीबाल खेलते नजर आए। खुद को फिट रखने के लिए खेलकूद की यह व्यवस्था की गई है। इसके लिए शिविरों के पीछे खाली जगह को खुद खेलने लायक बनाया।
परेड से पहले किसानों ने सजाए ट्रैक्टर
गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड से पहले सोमवार को किसान अपने ट्रैक्टरों को सजाते नजर आए। कोई ट्रैक्टर की लाइटिंग व्यवस्था दुरुस्त कराता दिखाई दिया तो कोई साउंड सिस्टम दुरुस्त कराता नजर आया। कुछ ने फूलों से अपने ट्रैक्टर सजाए। ऐसे में फूल विक्रेताओं को भी काम मिल गया।
रास्ते में शिविर में छका लंगर
दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के लिए जाने वालों को खरावड़ में राहत दी गई। इसके लिए ग्रामीणों ने यहां शिविर लगाए हुए हैं। यहां उन्हें भोजन, चाय, दवा मुहैया कराई जा रही हैं। इन शिविरों पर सोमवार को महिलाओं ने खाना बना कर किसानों को खिलाने में सहयोग दिया। यहां हांसी की एयरक्राफ्ट इंजीनियर अंजना अपनी मां, मौसी व भाई-बहन के साथ शिविर पर पहुंची। यह परिवार एक दिन टीकरी बॉर्डर पर किसानों की सेवा के बाद खरावड़ पहुंचा। इंजीनियर बेटी के पिता व मौसा अभी भी वहीं आंदोलनरत हैं।
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