रोहतक। दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) व सिने फाउंडेशन हरियाणा की ओर से पांच दिवसीय फिल्म कार्यशाला मंगलवार को शुरू हुई।
विश्वविद्यालय के वास्तु कला संकाय के लेखक व फिल्म निर्माता अतुल गंगवार के नेतृत्व में पटकथा लेखन पर उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को पटकथा लेखन के उपकरणों और तकनीकों से परिचित कराया गया। साथ ही इसे फिल्म निर्माण की आधारशिला बताया।
उन्होंने विचार से लेकर कहानी कहने तक की यात्रा पर विस्तार से चर्चा करते हुए कथात्मक संरचना दर्शकों के भावनात्मक और बौद्धिक जुड़ाव को फिल्म के साथ आकार देने की जानकारी साझा की।
कार्यशाला के प्रतिभागियों को पटकथा के बुनियादी घटकों जैसे भाषा, संवाद, विवरण, गति और लहजे से परिचित कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तत्व व्यापक सिनेमाई अनुभव में योगदान देता है।
फिल्म निर्माण में लेखन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एक फिल्म लिखित शब्दों से शुरू होती है। पटकथा वह रीढ़ है जिस पर सिनेमा की पूरी इमारत टिकी होती है। अच्छा लेखन न केवल पात्रों में जान फूंकता है बल्कि फिल्म की आत्मा को भी परिभाषित करता है।
एक ठोस पटकथा के बिना, बेहतरीन निर्देशन या छायांकन भी फिल्म को नहीं बचा सकता। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल कौशल सीखना नहीं है बल्कि उस कौशल को इस तरह से प्रकट करना है जिससे समुदाय और देश को लाभ हो।
कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक ने प्रतिभागियों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आजकल अवसर अक्सर आपके दरवाजे पर दस्तक देते हैं। यह आप पर निर्भर है कि आप उन्हें पहचानें और उनका अधिकतम लाभ उठाएं।