मदीना गिंदरान का एक ऐसा सियासी घराना है, जिसके सिर पर पिछले 25 साल से
सियासी ताज सजता है। उस सियासी घराने में पिछले 25 साल से पति सरपंच बनता
है तो पत्नी ब्लाक समिति सदस्य बन जाती है और पत्नी सरपंच बनती है तो पति
समिति सदस्य होता है।
यह सियासी घराना एक बार फिर से चुनावी जंग में उतरा
है, जिसमें पत्नी सरपंच तो पति ब्लाक समिति सदस्य पद के लिए ताल ठोंक रहे
है। इसबार यह जरूर है कि पहले टक्कर में कई प्रत्याशी रहते थे और इस बार
केवल एक प्रत्याशी ही सामने खड़ा है। हर किसी की निगाह इसपर ही टिकी है कि
सियासी घराने को फिर से चौधर मिलती है या नहीं।
मदीना गिंदरान का
राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है, क्योंकि वहां 5058 वोटरों के
हाथ में चौधर की कड़ी है। यह वोटर उस कड़ी को जिस प्रत्याशी के लिए खोल
देंगे, उसे चौधर मिल जाएगी। हालांकि मदीना गिंदरान की चौधर की जंग में केवल
दो प्रत्याशी आमने-सामने खड़े है और दोनों में सीधी टक्कर हो रही है।
उनमें से एक प्रत्याशी सियासी घराने से ताल्लुक रखता है, जिनके पास पिछले
25 सालों से चौधर है। यह प्रत्याशी सुनील उर्फ कल्लू की पत्नी सोमलता है।
सुनील पहली बार 1991 में सरपंच बने तो उनकी पत्नी सोमलता ब्लाक समिति की
सदस्य रही। 1994 में सोमलता सरपंच बनी तो सुनील ब्लाक समिति के सदस्य बने
और महम ब्लाक समिति के प्रधान भी बन गए।
फिर 2000 से 2005 तक सुनील ही
सरपंच रहे और उनकी पत्नी सोमलता ब्लाक समिति की सदस्य रही। 2010 में चौधर
फिर से सोमलता को मिली तो सुनील ब्लाक समिति के सदस्य बन गये। इसबार फिर से
सोमलता चौधर की जंग में उतरी है तो सुनील ब्लाक समिति सदस्य के लिए ताल
ठोंक रहे है।
चौधर की जंग में सोमलता के सामने ओमप्रकाश की पुत्रवधू अंजू
देवी मैदान में उतरी है और दोनों प्रत्याशियों में आमने-सामने का मुकाबला
है। लेकिन यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि सियासी घराना अपनी
चौधर बचाने में कामयाब रहा या गांव ने नये प्रत्याशी के सिर चौधर का ताज
पहनाया।