प्रदेश में कौनसा इंजीनियरिंग कॉलेज कितना बेहतर और कितना फिसड्डी है, अब यह घर बैठे पता लग सकेगा।
ब इंजी. कॉलेज अभिभावकों और छात्रों को रैंकिंग के नाम पर गुमराह नहीं कर सकेंगे।
हरियाणा स्टेट टेक्निकल एजुकेशन सोसायटी ने शैक्षणिक सत्र 2015-16 से इंजीनियरिंग कॉलेजों में नया सिस्टम लागू किया है।
कॉलेजों को एडमिशन के साथ-साथ बीटेक रिजल्ट भी वेबसाइट पर डालना होगा।
प्रदेश में लगभग 172 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इसमें 82 कॉलेज एमडीयू से संबद्ध हैं।
अभी तक कॉलेज सिर्फ एडमिशन से संबंधित रिकॉर्ड ही वेबसाइट पर डालते थे।
यदि स्टूडेंट्स जानना भी चाहे कि वहां की पढ़ाई कैसी है और रिजल्ट प्रतिशत क्या है तो इसका कोई ठोस आधार नहीं था।
ऐसे में स्टूडेंट्स अक्सर गुमराह हो जाते थे। इन झंझटों से बचने के लिए सोसायटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर ने इस सत्र से इंजीनियरिंग कॉलेजों में नया सिस्टम शुरू किया है।
अब कॉलेजों को बीटेक का पूरा रिजल्ट ऑनलाइन डालना होगा। रिजल्ट देख स्टूडेंट्स अनुमान लगा सकते हैं कि कॉलेज किस रैंक का होगा और वहां पढ़ाई का स्तर क्या होगा।
हालांकि यह सिस्टम सिर्फ बीटेक के रिजल्ट पर ही लागू होगा। सभी कॉलेजों को इस आशय के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
दो वर्ष का रिजल्ट होगा ऑनलाइन
नए सिस्टम के तहत कॉलेजों को फिलहाल पिछले दो वर्ष तक का बीटेक का रिजल्ट वेबसाइट पर डालना होगा। इसकेे बाद कॉलेजों को हर वर्ष बीटेक की सभी ब्रांच का अलग-अलग रिकॉर्ड अपलोड करना होगा। कोई भी कॉलेज की वेबसाइट खोलकर उसे देख सकता है।
एमडीयू में बीटेक के 6 कोर्स
एमडीयू के इंस्टीट्यूट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में बीटेक के 6 कोर्स हैं। इसमें बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, बीटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग, बीटेक इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, बीटेक बॉयोटेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग शामिल हैं। मेकेनिकल और कंप्यूटर साइंस में 120-120 सीटें है, जबकि बाकी चारों में 60-60 सीटों की इनटेक है।