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पेंशन बनवाने के लिए भटक रहे बुजुर्ग

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साहब! ब्याह पाछै बालक लेट होए, बालकां की उम्र 40 साल कोन्या होई, हामैं तो 60 तै ऊपर हो लिए, बना दो म्हारी पेंशन। कुछ ऐसी ही फरियाद लेकर सम्मान भत्ते का हक पाने के लिए बुजुर्ग इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड में समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। वीरवार को महम, सुनारियां, रोहतक, लाखमाजरा के बुजुर्ग पेंशन के लिए कार्यालय पहुंचे। इस दौरान कई बुजुर्गों ने बताया कि आधार कार्ड से लेकर वोटर कार्ड में उनकी उम्र 60 से ऊपर है। लेकिन उनकी बड़ी संतान की उम्र 37 साल की है तो अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं। अधिकारियों का कहना है कि आवेदक के बड़े बच्चे की उम्र 40 साल, बच्चों का स्कूल लिविंग सर्टिफिकेेट, 2005 से पहले बना वोटर कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या हॉस्पिटल सर्टिफिकेट लेकर आओ, तभी उम्र के हिसाब से कागज पूरे माने जाएंगे। हर महीने की 26 तारीख को वे अपने कागजात लेकर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी पेंशन नहीं बन पा रही है। बता दें कि हर महीने की 26 तारीख को समाज कल्याण विभाग सिविल अस्पताल के माध्यम से मेडिकल जांच कर आयु का प्रमाण पत्र देता है। इसके बाद ही पेंशन प्रक्रिया शुरू हो पाती है।
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टोकन के फेर में उलझे रहे बुुजुर्ग
वीरवार सुबह 8 बजे से ही टोकन के लिए बुजुर्गों की लाइनें लग गई थी। लेकिन बुजुर्गों की भीड़ को देखते हुए कभी टोकन की लाइन को इस दरवाजे पर तो कभी उस दरवाजे पर शिफ्ट किया जा रहा था, इससे बुजुर्गों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। इसके अलावा कुछ बुजुर्ग ऐसे भी थे जिन्हें पता ही नहीं था कि मेडिकल जांच के लिए पहले सिविल अस्पताल से कार्ड बनवाकर लाना होता है। लाइन में लगकर जब इन बुजुर्गों को टोकन मिलने का समय आया तो टोकन देने वाले कर्मचारी ने कार्ड नहीं होने पर बुजुर्गों को सिविल अस्पताल में कार्ड बनवाने की हिदायत दी। ऐसे में बुजुर्ग कभी कार्ड तो कभी टोक न के फेर में इस ठिठुराती सर्दी के बीच उलझे रहे। वीरवार को कार्यालय में करीब 250 बुजुर्ग पहुंचे लेकिन विभाग की तरफ से 160 बुजुर्गों को ही टोकन बांटे गए। इसके बाद सिविल अस्पताल से कार्ड बनवाकर आने वाले बुजुर्ग टोकन का इंतजार करते रह गए।
आयु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज
- जन्म प्रमाण पत्र।
- शैक्षणिक रिकॉर्ड से आवेदक की आयु 60 वर्ष प्रमाणित होना।
- बड़ी संतान की उम्र 40 साल होना।
- 2005 से पहले का वोटर कार्ड।
कभी महम तो कभी रोहतक समाज कल्याण विभाग में चक्कर काटने वाली फरमाणा गांव की मूर्ति देवी ने बताया कि शादी के समय उनकी उम्र 16 साल थी। शादी के 15 साल बाद उन्हें पहला बेटा विकास हुआ था। अब ये अधिकारी उनसे बड़े बेटे विकास की उम्र का प्रमाण लाने को बोलते हैं, विकास की उम्र तो अभी 30 साल ही है। मेरी उम्र तो 60 से ऊपर की हो चुकी है, लेेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी बड़ा बेटा ही 30 साल का है अम्मा आपकी उम्र 60 की नहीं हुई है। मूर्ति सुबह 8 बजे से विभाग में पेंशन बनवाने की आस में बैठी रही, लेकिन उन्हें उम्र पूरी ना होने का हवाला देकर वापस भेज दिया गया।
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बाबरा मोहल्ला की रहने वाली संतोष देवी का कहना है कि आधार कार्ड से लेकर वोटर कार्ड हर कागज में उनकी उम्र 60 से ऊपर है। लेकिन उनके बड़े बेटे आजाद की उम्र अभी 37 साल की है तो अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं। ये बोलते हैं कि बेटे की उम्र ही 40 की नहीं तो आप 60 की कहां से हो गई। संतोष का कहना है कि शादी के बाद उनकी पहली बेटी हुई थी, जिसकी डिलिवरी के टाइम मौत हो गई। उनके पांच साल बाद बेटा आजाद हुआ था। संतोष के अनुसार उनकी उम्र 60 साल से ऊपर हो चुकी है पर अधिकारी उनके कागज जमा नहीं करते। वह चार बार चक्कर काट चुकी हैं।
सुनारियां से आई राजबाला का कहना है कि शादी के पांच साल बाद पहली बेटी हुई थी, जिसकी डिलिवरी के टाइम की मौत हो गई। इसके ढाई साल बाद उन्हें बेटा मनोज हुआ, जिसकी उम्र अभी 36 साल है। ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि बेटे की उम्र ही 36 साल है मतलब आपकी उम्र 60 साल नहीं हुई है। राजबाला का कहना है कि वह पांच महीने से लगातार यहां कागज जमा कराने आ रही हैं, लेकिन कोई उनकी दरकार सुनने को तैयार नहीं। बेटा शराब पीता है, बहू रोटी भी नहीं देती। क्या ऐसे में उसे सम्मान पाने का हक नहीं है?
धर्मवीर का कहना है कि उनके नाम में गड़बड़ है। कई बार विभाग और संबंधित विभागों के चक्कर काटने के बाद भी नाम ठीक नहीं हो पा रहा। वोटर कार्ड में उनका नाम धर्मवीर तो आधार कार्ड में धर्मबीर है। धर्मवीर महम के फरमाणा गांव के रहने वाले हैं, वह महम में भी कई बार अपनी पेंशन संबंधी कागज जमा करवा चुके हैं, लेकिन उनका आवेदन हर बार रिजेक्ट कर दिया जाता है। धर्मवीर ने सीएम विंडो पर शिकायत करने की बात कही है।
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