कोरोना संकट का असर शिक्षण संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ा है। कोरोना संकट के चलते ऐसा पहली बार हुआ है, जब अन्य देशों के विद्यार्थियों ने जिले के तीनों विश्वविद्यालयों (गुजवि, हकृवि और लुवास) से दूरी बना ली है। दाखिला प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद भी अब तक किसी विदेशी विद्यार्थी ने एडमिशन के लिए इच्छा नहीं जताई। हालांकि आगामी दिनों में भी विदेशी विद्यार्थियों के इच्छा जताने पर दाखिले किए जाने का विशेष प्रावधान किया गया है।
बता दें कि हर वर्ष तीनों विवि में करीब 20 से अधिक विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। कोरोना संकट के चलते विवि प्रशासन भी विदेशों में प्रभावी तरीके से प्रचार-प्रसार नहीं कर पाए। ऐसे में इस बार किसी भी विदेशी विद्यार्थी ने हिसार के विश्वविद्यालयों में दाखिले को लेकर रुचि नहीं दिखाई। जिले के तीनों विश्वविद्यालयों में फिलहाल विभिन्न देशों के करीब 81 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें अधिकांश विद्यार्थी स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं या पीएचडी शोधार्थी हैं। एचएयू और लुवास में 57 विदेशी विद्यार्थी हैं। इनमें 26 लड़कियां हैं, जो भूटान, नेपाल, तंजानिया, म्यांमार और जिंबाब्वे से हैं। वहीं, 31 लड़के हैं, जो अफगानिस्तान, भूटान, नाइजीरिया, म्यांमार, श्रीलंका, इथोपिया, मोजांबिक और केन्या से हैं। गुजवि में 24 विदेशी विद्यार्थी हैं, जो इथोपिया, बांग्लादेश और नेपाल से हैं।
कोट
कोरोना के चलते अब तक एक भी विदेशी विद्यार्थी दाखिले के लिए नहीं आया है। अगर किसी विद्यार्थी का आग्रह आता है तो उसका दाखिला किया जाएगा। इसके लिए हम सरकार से भी बात करेंगे।
- प्रो. समर सिंह, कुलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार।