पंचायत चुनाव में भले ही प्रत्याशियों के लिए पांच शर्तों को लागू कर दिया गया हो, लेकिन अब भी प्रत्याशियों पर ही विश्वास किया जाएगा।
प्रत्याशी को बिजली निगम और बैंक से बकाया नहीं होने की एनओसी तो लेनी पड़ेगी, लेकिन नामांकन में शिक्षा और शौचालय के शपथ पत्र को ही प्रमाण मान लिया जाएगा।
प्रत्याशी को केवल एक शपथ पत्र (एफिडेविट) भरना होगा। प्रशासन की ओर से इस संबंध में तुरंत कोई जांच नहीं कराई जाएगी। यह जरूर है कि चुनाव से पहले या बाद में उनकी कोई शिकायत करता है तो जांच के बाद झूठ बोलने वाले प्रत्याशी पर केस दर्ज कराकर जिंदगी भर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाएगी।
प्रदेश सरकार की ओर से लागू की गई तीन शर्तों के लिए नामांकन करने वाले प्रत्याशी पर ही विश्वास किया जाएगा। इनमें शिक्षा, शौचालय और आपराधिक रिकॉर्ड शामिल रहेगा।
इनके लिए प्रत्याशी से केवल शपथ पत्र भरवाया जाएगा। उस शपथ पत्र के सहारे ही प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे और उसकी प्रशासन अपनी ओर से कोई छानबीन नहीं कराएगा।
यदि कोई उनकी शिकायत कर देता है या प्रशासन को किसी अन्य तरह से ऐसी शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। नामांकन करते समय प्रत्याशी को दो गारंटर देने होते हैं, जिनके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर होते हैं। अगर कोई प्रत्याशी झूठा शपथ पत्र देता है तो उसके गारंटर भी फंसेंगे। उन पर भी झूठा शपथ पत्र देने वाले का गारंटर बनकर गुमराह करने के मामले में मुकदमा दर्ज होगा।
पंचायत चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशियों से कर्ज के मामले में एनओसी लेंगे तो शिक्षा, शौचालय व अपराध की शर्तों में शपथ पत्र भरवाया जाएगा। उस शपथ पत्र में वैसे कोई झूठी जानकारी नहीं देगा, क्योंकि उसकी कोई न कोई शिकायत कर देगा। अगर फिर भी कोई झूठी सूचना शपथ पत्र में देता है तो उसमें जांच करके कार्रवाई की जाएगी और ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
ओ. पी. धनखड़, पंचायती राज मंत्री।