जींद। जिले में हाल ही में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण गेहूं और सरसों की फसलों को नुकसान हुआ है। पिछले 72 घंटों में 541 किसानों ने कृषि विभाग से संपर्क कर जिले में 50,000 एकड़ में हुए नुकसान का दावा किया है। इसके अलावा, बीमा पॉलिसी के तहत कवर नहीं किए गए किसानों के गांवों में सैंपल सर्वे के अनुसार फसलों के नुकसान का आंकलन राजस्व, कृषि और जिला प्रशासन के अधिकारियों की टीम करेगी। किसान यूनियन कि प्रवक्ता रामराजी ढुल ने कहा कि शुक्रवार को हुई भारी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इसलिए किसानों की मांग है कि सरकार 40,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे। बीकेयू के प्रवक्ता रामराजी ढुल ने बताया कि फसल के नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर डीसी और कृषि विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले तक किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन शुक्रवार रात हुई ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान उचाना क्षेत्र में हुआ है। घोघड़िया, बड़ौदा, कुचराना खुर्द और कुचराना कलां समेत कई गांवों का दौरा किया और प्रभावित किसानों से बातचीत की, जिन्हें भारी नुकसान हुआ है। ढुल ने कहा कि ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे उत्पादन में 50 फीसदी से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। इसलिए राज्य सरकार को किसानों को फसल नुकसान के लिए कम से कम 40,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देकर राहत प्रदान करनी चाहिए।
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कृषि विभाग और जिला प्रशासन की टीमों द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। बारिश के कारण क्षेत्र में सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
गिरीश नागपाल कृषि उपनिदेशक जींद।