बादली। मजदूरों के अभाव में गेहूं की कटाई का काम धीमी गति से चल रहा है जबकि बदलते मौसम के मिजाज से किसान के माथे पर चिंता की लकीर साफ दिखाई दे रही है। किसान के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि इस बार कटाई के लिए मजूदर किसी भी भाव पर उपलब्ध नहीं हो रहा क्योंकि कटाई के सीजन में बिहार और यूपी से मजदूर आता था मगर इस बार बाहरी मजदूर जरूरत के अनुसार नहीं आया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार मजूदरों के अभाव में कटाई का सीजन लंबा चल सकता है।
लोकसभा चुनाव का असर
देश में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। बाहर से आए कुछ श्रमिकों में दीपचंद, कैलाश, अमीबाई और भानु ने बताया कि मजदूर अपने प्रदेश में चुनाव को लेकर मतदान के इंतजार में है। चुनाव के चलते श्रमिक अपने प्रदेश में काम कर रहा है ताकि मतदान किया जा सके।
बिहार व यूपी से आते हैं मजदूर
हरियाणा प्रदेश में मजदूरी का जिम्मा आमतौर पर बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों के कंधों पर होता है। यहां के मजदूरों की तुलना में बाहरी मजदूर सस्ता भी होता है और काम भी अच्छा करता है। क्षेत्र में खेती बाड़ी से लेकर भवन निर्माण कार्य करने वालों में 80 प्रतिशत से ज्यादा बाहरी मजदूर होते हैं।