सांपला। गर्मी बढ़ते ही कस्बे के अधिकांश मोहल्लों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में पानी की किल्लत बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि लोग टैंकरों के सहारे पानी जुटाने को मजबूर हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं, हैंडपंप और ट्यूबवेलों पर निर्भरता बढ़ गई है। महिलाओं को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
क्षेत्र की बड़ी आबादी नहरी पानी पर निर्भर है लेकिन नहर में पानी आपूर्ति बंद होने से संकट और गहरा गया है। आशीष कुमार, सोनू, निर्मला, सुमन, गीता, सोनिया, बबली आदि ने बताया कि वर्ष 2024 तक नहर में 16 दिन पानी आता था और 24 दिन बंद रहता था लेकिन पिछले दो वर्षों में स्थिति और खराब हो गई है।
अब नहर में पानी आने और बंद होने का कोई निश्चित समय नहीं है। कई बार बीच में ही पानी बंद हो जाता है जिससे जलघरों को पूरा नहीं भरा जा पाता। इस बार भी जलघरों में केवल 60 प्रतिशत पानी ही स्टोर हो सका है।
शहर में करीब 45 हजार आबादी को प्रतिदिन दस लाख लीटर पानी की आवश्यकता है जबकि विभाग पहले से ही पर्याप्त सप्लाई नहीं दे पा रहा। विभाग तीन दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति कर रहा है।
चार जलघरों से होती है पानी आपूर्ति
कस्बे में पेयजल सप्लाई के लिए चार जलघर हैं। पिछले दिनों नहर में तीन दिन पानी आया था। जलघर के तालाब नहीं भर पाए। जलघर में चार दिन का पानी बचा है। गांव में भी पानी का संकट बना हुआ है।
बूस्टिंग स्टेशन की मोटर भी पुरानी
शहर के विभिन्न हिस्सों में हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए बने बूस्टिंग स्टेशनों की मोटरें पुरानी हो जाने के कारण पानी का प्रेशर नहीं बन पाता। इससे अंतिम छोर पर बसे लोग पानी से वंचित रह जाते हैं।
वर्जन
पेयजल व्यवस्था नहरी पानी के सहारे है, अगर नहर समय पर आ जाती है तो लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। ट्यूबवेल से सप्लाई दी जाती है।
- अनिल कुमार, एसडीओ, सांपला