इसे रेलवे की मरम्मत में लापरवाही कहे या कोई तकनीकी समस्या कि महीने के भीतर जिस ट्रैक से मालगाड़ी बे-पटरी हुई थी ठीक उसी जगह सोमवार सुबह एक बार फिर मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया।
हालांकि जान माल का नुकसान नहीं हुआ लेकिन घंटों ट्रैक जाम रहा। कई घंटों की मशक्कत के बाद ट्रैक दुरुस्त किया जा सका। इस हादसे रेलवे बोर्ड की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, क्योंकि पिछले हादसे की रिपोर्ट पर ही अब तक फैसला नहीं हो पाया और उसी जगह फिर ट्रेन उतर गई।
रेवाड़ी से लहरा मुहब्बत कोयला भर कर जा रही मालगाड़ी का इंजन सोमवार सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर रोहतक स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 3 के पास पटरी से उतर गया।
बताया जाता है कि जैसे ही मॉलगाड़ी प्लेटफार्म नंबर तीन के लूप पर पहुंची, इंजन के चक्के पटरी से उतर गए। ट्रेन की गति ज्यादा नहीं थी इसलिए बड़ा हादसा नहीं हुआ।
लेकिन इस हादसे में रेलवे की पटरियों की सुरक्षा व्यवस्था और मरम्मत की पोल खुल गई है। पटरी से इंजन क्यों उतरा इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन रेलवे के सूत्रों का कहना है कि पिछले माह माल गाड़ी उतरने के बाद फौरी तौर पर तो उसकी मरम्मत कर दी गई थी, इसकी रिपोर्ट भी बना ली गई थी। इसके बाद भी इस पटरी पर तकनीकी दिक्कत के चलते यह हादसा हुआ है। बताया यह भी जा रहा है कि पटरी को कसने के लिए लगाए गए नट बोल्ट में से एक जगह का नट बोल्ड खुला हुआ था। संभवत: इसी कारण पटरी में गेप आया होगा और इंजन पटरी से उतर गया होगा।
घंटों रहा ट्रैक जाम
इंजन पटरी से उतने के बाद स्टेशन मास्टर, ट्रेफिक इंचार्ज सहित कई अधिकारी वहां पहुंचे। सबसे पहले डिब्बों को अलग करके उन्हें दूसरे ट्रैक पर ले जाया गया। इसकेबाद शुरू हुई इंजन को पटरी पर लाने की मशक्कत। करीब ढाई घंटे से ज्यादा वक्त के बाद इंजन पटरी पर लाया गया। इस दौरान इस ट्रैक पर यातायात करीब तीन घंटे तक प्रभावित रहा।
चूक बड़ी फिर भी रेलवे मौन
रेलवे स्टेशन पर कोई गाड़ी पटरी से उतर जाती है लेकिन कोई अधिकारी इस बारे में कुछ नहीं बोलता। ये रेलवे अधिकारियों के जिम्मेदार रवैये को दर्शाता है। इस बारे में रेलवे के अधिकारियों से पूछा गया तो सभी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।