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Rohtak News: ड्रेनें ओवरफ्लो...पिलाना में नहर टूटी, सांपला के 22 गांवों में 5000 एकड़ फसलें पानी में डूबीं

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बहलबा माइनर में छोड़ा गया पानी दिखाते महम के लोग। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर/संवाद
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रोहतक/महम/सांपला/कलानौर। बारिश जिले के किसानों व आमजन के लिए आफत बन गई है। वीरवार को हुई बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बारिश से खेत, स्कूल, मकान व मैदान सब डूबने लगे हैं। ड्रेनें ओवरफ्लो होने लगी हैं। नहरों में भी पानी छोड़ा जा रहा है। कलानौर हलके के गांव पिलाना में नहर टूटने से डेढ़ सौ एकड़ फसलें डूब गईं। वहीं, सांपला खंड के 22 गांवों की करीब 5000 एकड़ भूमि पर खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं।
आंवल गांव में ड्रेन टूटने से जलभराव की समस्या और बढ़ गई। महम में बहलबा रजबहा में भिवानी डिस्ट्रीब्यूटरी से दोपहर को बरसाती पानी छोड़ दिया गया। इससे महम, किशनगढ़, इमलीगढ़ व अन्य गांव डूबने का खतरा बढ़ गया है।
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जिले में बारिश से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। शहर को जलभराव व बाढ़ से बचाने वाली ड्रेन नंबर आठ 15 साल में पहली बार फुल चल रही है। अब तक स्थिति नियंत्रण में है। इस ड्रेन में और पानी आया तो शहर के हालात भी बिगड़ सकते हैं।
मौसम विभाग का अच्छी बारिश होने का अलर्ट चिंता बढ़ा रहा है। सहायक ड्रेनों से पानी ज्यादा आने या बारिश होने पर भी पानी शहर में आने का खतरा पैदा हो गया है।


सांपला के 22 गांवों में 5000 एकड़ फसलें पानी में डूबीं



संवाद न्यूज एजेंसी
सांपला। एक सप्ताह में करीब कस्बे में 100 मिमी बारिश हुई है। इसके साथ ही मानसून सीजन का आंकड़ा करीब 400 मिलीमीटर पार पहुंच गया है। एसडीएम उत्सव आनंद, नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार व अन्य स्टाफ इलाके पर निगरानी रखे हुए। इसी कड़ी में वीरवार को इलाके की स्थिति का जायजा लिया गया। प्रशासन के मुताबिक, प्रत्येक गांव में पानी निकासी के लिए पंप सेट लगाए गए हैं। रोजाना हो रही बारिश प्रशासन के इन प्रयासों को फेल साबित कर रही है।
कृषि विभाग के मुताबिक, बारिश से कपास, बाजार, सब्जियों समेत अन्य फसलों में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। वीरवार सुबह व दोपहर बाद तेज बारिश हुई। इस वजह से गांव की बस्तियों व कस्बे में जनजीवन प्रभावित हो गया। किसान सतीश कुमार, अशोक, बिजेंदर बिल्लू, हरेंद्र ने बताया कि जमीन का वाटर लेवल ऊपर आ गया है।
पानी घटने के बजाय बढ़ गया है। हाल में कसरैंटी, इस्माईला, समचाना, मोरखेड़ी अटायल, चुलियाना, गांधरा, खरावड़, गिझी, नया बांस समेत कई गांवों में खेतों के अलावा तालाब के साथ लगती बस्तियों में पानी भर गया है।

गिझी में दीवार, कसरैंटी में मकान गिरा
बारिश के कारण सांपला के गिझी व कसरैंटी में दो हादसे हुए हैं। इनमें किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। गिझी निवासी ईश्वर ने बताया कि उसने पशुओं के लिए घर बनाया हुआ था। बारिश से इस मकान की एक दीवार व छत गिर गई। हादसे के समय पशु बहार बंधे हुए थे।
कसरैंटी निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उसका मकान बारिश के कारण गिर गया। हादसा में परिवार बाल-बाल बचा है। प्रशासन से आर्थिक सहायता की आस है। नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार ने बताया कि मकान मालिक के नुकसान की रिपोर्ट बना कर सरकार को भेजी जा रही है।

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कलानौर में बाढ़ के हालात, घरों में आने लगीं दरारें
- वार्ड नंबर नौ में जल निकासी के लिए नहीं मिला बिजली का कनेक्शन
कलानौर। कलानौर व आसपास के क्षेत्र में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। आंवल, गढ़ी, निगाना, मसूदपुर, पटवापुर, लाहली, काहनौर, सांगाहेड़ा, बसाना, सैंपल, खैरड़ी, गुढ़ान समेत अन्य गांवों के खेतों में जलभराव बना हुआ है। यहां पानी कम नहीं हो रहा है।
कलानौर के तालाब ओवरफ्लो हो चुके हैं। बरसाती पानी लोगों के घरों में घुसने लगा है। वीरवार को दिनभर गलियों से पानी निकालने का सिलसिला जारी रहा। बुधवार को उपायुक्त सचिन गुप्ता ने वार्ड नंबर आठ व नौ आईटीआई के पीछे बस्ती का निरीक्षण किया।
यही नहीं उपायुक्त ने दो दिन में पानी निकासी का आश्वासन दिया था। वीरवार को दिनभर बस्ती निवासी संदीप, जयभगवान, पार्षद अमित कुमार, रामकुमार, राजेश, संजय व अन्य लोग बिजली कनेक्शन के लिए निगम के चक्कर लगाते रहे।
एसडीओ शमशेर सिंह ने कहा कि बिजली कनेक्शन की फाइल का रजिस्ट्रेशन हो गया है। एसडीएम आशीष कुमार से बिजली कनेक्शन लगवाने की बात की तो उन्होंने नपा सचिव विनय कुमार से बात करने के लिए कही। देर रात तक पानी निकासी के लिए कोई कनेक्शन प्राप्त नहीं हुआ।

बरसात से बाहरी क्षेत्र ज्यादा प्रभावित
कलानौर शहर में जलभराव कम है। कस्बे से बाहर के वार्ड नंबर 1, 2, 8, 9, 10, 11, 12, 14, 15, 16 में जलभराव की समस्या बनी हुई है। वार्ड नंबर नौ के पार्षद अमित कुमार ने बताया कि लोगों के घरों में काफी नुकसान हो चुका है। घरों में फर्श से पानी निकलना शुरू हो गया है।
लोगों की टाइलें उखड़ गई हैं। अनेक घरों की दीवारों में दरारें आई हुई हैं। लोग निजी खर्चे से पानी निकासी करा रहे हैं। कई घरों में एक सप्ताह से चूल्हा नहीं जला है। लोग धर्मशाला या किराये पर गुजारा करने को विवश हैं।

पिलाना के ग्रामीण बोले- सिंचाई विभाग की लापरवाही से टूटी नहर
वीरवार सुबह पिलाना में नहर टूट गई। इसमें 150 एकड़ फसल ज्वार, बाजरा, कपास, गन्ना, अरहर की फसलें पानी में डूब गईं। गांव के किसान सोमवीर, संजय, प्रदीप, जसवीर, बबलू ने बताया कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते पिलाना में नहर टूटी है। आरोप है कि नहर की समय रहते सफाई नहीं कराई थी। किसानों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
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माइनर में पानी चलता रहा तो बस्ती में घुस जाएगा पानी
महम। वीरवार को मौसम साफ रहा। धूप निकली तो लोगों ने कुछ राहत की सांस ली। दोपहर को बहलबा रजबहे में बरसाती पानी छोड़ दिया गया। इससे दोबारा महम वासियों की नींद उड़ गई है। रजबहे में पानी डालने से महम, किशनगढ़ व इमलीगढ़ में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
शहर के वार्ड 14 के पार्षद विकास श्योराण, नान्हा नंबरदार, राजू नंबरदार, संजय ग्रेवाल, सोमबीर गोयत, नरेंद्र उर्फ लिलुआ एमसी, धर्मपाल पंच, जग्गी ने बताया कि खेतों का पानी निकाल भिवानी डिस्ट्रीब्यूटरी में डाला गया है। इसके बाद इसे बहलबा रजबहा में छोड़ दिया गया। पानी की अधिकता से रजबहा टूटने के कगार पर है। खेत पहले से ही लबालब हैं। खेतों का ढाल गांव की ओर है। इसी तरह माइनर में पानी चलता रहा तो बस्ती में घुस सकता है।
लोगों ने एसडीएम मुकुंद से बहलबा रजबहा बंद कराने की गुहार लगाई है। एसडीएम ने खेतों में जाकर रजबहा का निरीक्षण किया। यहां लोगों ने एसडीएम को कहा कि खेतों में जलभराव है ही, अब इस पानी से बस्ती को डूबने से बचाया जाए।
यह केमिकल युक्त पानी महम के जलघर प्रथम में ज्यादा मात्रा में जा रहा है। जलघर का पानी लोगों को पीने के लिए सप्लाई किया जाता है। ऐसे में लोगों व पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
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एसडीएम मुकुंद ने कहा कि बस्ती को किसी भी हालत में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मौके का निरीक्षण किया गया है। इस मामले में उचित निर्णय लिया जाएगा।

बहलबा माइनर में छोड़ा गया पानी दिखाते महम के लोग। संवाद

बहलबा माइनर में छोड़ा गया पानी दिखाते महम के लोग। संवाद

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