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Rohtak News: सड़क हादसे में टूट गया था पैर, डॉ. अरुणा ने बिस्तर पर पड़े-पड़े लिख डाली किताब

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रोहतक। कहते हैं हौसले मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। दुर्घटना के बाद दो साल तक बिस्तर पर रहने के बावजूद डॉ. अरुणा अंचल ने हार नहीं मानी। बिस्तर पर पड़े-पड़े ही उन्होंने लेखन जारी रखा और फिर क्यों पूछे कौन हूं मैं...पुस्तक लिख डाली।
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बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अरुणा अंचल का वर्ष 2019 में एक सड़क हादसे में पैर टूट गया था। उनके पैर में रॉड डालनी पड़ी। दुर्घटना के कारण उन्हें दो साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा और चलना-फिरना मुश्किल हो गया। कठिन समय में भी उनका हौसला नहीं टूटा।

डॉ. अरुणा आंचल का जन्म 27 अगस्त को पंजाब के आदमपुर में हुआ था। उनके पिता हंसराज सैनी एयरफोर्स में थे। डॉ. अरुणा की पढ़ाई देश के विभिन्न स्थानों पर हुई।
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उनकी शादी रोहतक के कृष्णा सैनी के साथ हुई है। विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा शास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपने कॅअरियर की शुरुआत एक निजी स्कूल में अध्यापन से की थी। करीब एक दशक तक यहां कार्य करने के बाद वे झज्जर में एक स्कूल की प्रधानाचार्य रहीं।

उन्होंने शिक्षण महाविद्यालय में प्राचार्य के रूप में लगभग दस वर्षों तक सेवाएं दीं। पिछले दो दशकों से वह शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं।

30 बार कर चुकी हैं रक्तदान
डॉ. अरुणा अंचल शिक्षण कार्य के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। डॉ. अरुणा अब तक 30 बार रक्तदान कर चुकी हैं। महिलाओं और युवतियों को जागरूक करने के लिए भी लगातार काम कर रही हैं। उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. अरुणा को शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के लिए शाश्वत सम्मान, मातृ शक्ति अवॉर्ड, नारी शक्ति अवॉर्ड और उत्कृष्ट वक्ता सम्मान मिल चुका है।
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