रोहतक। डेंगू की मरीज पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ शारीरिक कष्ट व दूसरी तरफ महंगा इलाज लोगों को परेशान कर रहा है। डेंगू से जोड़ों में तेज दर्द व बुखार आता है। निजी अस्पतालों का महंगा इलाज लोगों की जेबें ढीली करा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीज को प्लेटलेट्स निशुल्क मिल जाती हैं, निजी में इनके लिए दो से ढाई हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
बरसाती मौसम में डेंगू का ग्राफ बढ़ रहा है। अब तक जिले में 15 डेंगू के मामले आ चुके हैं। ये केवल सरकारी लैब में एलाइजा जांच कराने वाले मरीजों की पुष्टि वाले हैं, जबकि निजी अस्पतालों में कार्ड टेस्ट के जरिए बड़ी संख्या में मरीज इलाज ले रहे हैं। इनके लिए निजी अस्पतालों में इलाज लेना महंगा साबित हो रहा है। सामान्य मामलों में चार से पांच दिन डेंगू मरीज से निजी अस्पताल 40 हजार रुपये से ज्यादा वसूल रहे हैं, इसमें वेंटिलेटर भी शामिल कर दिया जाता है। यह इलाज खर्च बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स खरीदने में 2000 से 2500 रुपये खर्च आता है।
5 दिन में ठीक हो जाता है डेंगू मरीज
5 दिन में डेंगू मरीज सामान्य होने लगता है। मरीज को घर पर सही रखरखाव और समय पर दवा दी जाए तो वह स्वस्थ हो सकता है। ज्यादातर वायरल के मरीजों में डेंगू होने की संभावना रहती है। इसकी वजह डेंगू का मुख्य लक्षण तेज बुखार होना है। पीजीआईएमएस (पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस) के आपातकालीन विभाग में मरीज कुछ घंटे रखा जाता है। ब्लड सैंपल जांच के बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। डेंगू के मरीज को सामान्यत: 4 से 5 दिन स्वस्थ होने में लगते हैं। वहीं, डेंगू दो हफ्ते में मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है।
यहां ज्यादातर मरीज वायरल के आ रहे हैं। ऐसे सभी मरीजों को ब्लड सैंपल लेकर डेंगू की जांच की जा रही है। इनके प्लेटलेट्स में भी गिरावट हो सकती है। यहां दो माह पहले से ही डेंगू के लिए कमरा आरक्षित है।
- डॉ. प्रियंका, उप चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।
नागरिक अस्पताल में दो माह पहले से ही डेंगू के कक्ष आरक्षित है। यहां ओपीडी में भी आने वाले वायरल और बुखार के मरीजों की रक्त जांच की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर प्लेटलेट्स गिरने वाले को मरीज को उचित दवा परामर्श की जा रही है। प्लेटलेट्स की उपलब्धता है।
- डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल।