संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। अमर उजाला और सुनो नहरों की पुकार मिशन के बीजदान-भविष्य का बीजारोपण अभियान को जनसहयोग मिल रहा है। अभियान तेजी से जनआंदोलन का रूप ले रहा है। शुक्रवार को दो हजार से अधिक नीम व अपराजिता (बेल) के बीजों का दान हुआ।
संस्था सदस्यों ने दान किए बीजों से सीडबॉल तैयार की। इन्हें सप्ताह के अंतिम दिन खाली जमीन में रोपा जाएगा। पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी के लिए बनाए गए बीजदान केंद्र पर बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रहरी पहुंच रहे हैं।
अभियान से समाज का हर वर्ग जुड़ रहा है। अभियान का उद्देश्य फलों और अन्य उपयोगी वृक्षों के बीजों को कूड़ेदान में जाने से बचाना है। यह भविष्य में लाखों पेड़ों का आधार बन सकते हैं।
दो सगे भाइयों ने दान किए नीम के 1000 से अधिक बीज
बीज दान अभियान के संयोजक डॉ. जसमेर हुड्डा ने बताया कि अभियान के प्रति युवाओं में भी उत्साह बढ़ रहा है। इसी कड़ी में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के छात्र तविश दलाल व उनके छोटे भाई स्वामी नित्यानंद पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी देवांग दलाल 1000 से अधिक नीम के बीज अभियान को समर्पित किए। बीज मिशन के सदस्य डॉ. संतलाल बुधवार, ईश्वर सिंह दलाल, राजवीर सिंह कालीरमन व रणबीर मलिक को सौंपे गए।
डॉ. रविंद्र नांदल ने भेंट किए अपराजिता के 1000 बीज
सेक्टर-14 निवासी डॉ. रविंद्र नांदल ने 1000 अपराजिता के बीज अभियान को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि अपराजिता केवल सजावटी पौधा नहीं बल्कि जैव विविधता को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण प्रजाति है। समाज विभिन्न प्रकार के पौधों एवं वृक्षों के बीज सुरक्षित कर हरियाली बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
अभियान से जुड़ें सामाजिक संस्थाएं
बीज दान अभियान के अध्यक्ष डॉ. अनुज नरवाल ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दीर्घकालिक सोच है। जिले के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्वयंसेवी संगठनों व परिवारों को इससे जुड़ना चाहिए।
जवाहर लाल नेहरू नहर किनारे सीड बॉल निर्माण शुरू
अभियान के तहत जवाहर लाल नेहरू नहर के किनारे सीडबॉल निर्माण औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। अभियान से जुड़े स्वयंसेवक मिट्टी, गोबर और प्राकृतिक मिश्रण से सीडबॉल तैयार कर रहे हैं। इनमें आम, जामुन, नीम, आड़ू, अपराजिता व अन्य देसी प्रजातियों के बीज शामिल हैं। डॉ. जसमेर हुड्डा ने बताया कि अगले चरण में जिले में बीज संग्रह अभियान चलेगा। इसके लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, उद्योगों व युवा संगठनों को अभियान से जोड़ा जाएगा।
बीज नहीं डालेंगे कूड़ेदान में...बीज दान कर जुड़ेंगे अभियान से
जामुन का वानस्पतिक नाम सिजीजियम क्यूमिनी (एल) स्कील्स है। यह मर्टेसी परिवार से संबंधित एक सदाबहार पेड़ है। यह इंडियन ब्लैकबेरी से भी जाना जाता है। जामुन का बड़ा पेड़ हमें केवल स्वादिष्ट फल देने के साथ पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जामुन का पेड़ प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करता है। यह बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर वातावरण को शुद्ध व तापमान कम रखने में सहायक है। जामुन में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट होता है।
- डॉ. अनिता रानी सहरावत, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, एमडीयू।
यूं करें बीजदान
सुभाष चौक स्थित अमर उजाला सिटी कार्यालय।
जेएलएन नहर दिल्ली बाईपास स्थित सुनों नहरों की पुकार मिशन का कार्यालय।
बीजदान करते समय नाम, पता, मोबाइल नंबर, बीज का प्रकार व अनुमानित संख्या भेजें
व्हाट्सएप नंबर 7419610102
9416077781
37-डॉ. अनिता रानी सहरावत, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, महर्षि दया
37-डॉ. अनिता रानी सहरावत, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, महर्षि दया