गोहाना। शहर और आसपास के गांवों में कुत्तों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल गोहाना में हर रोज औसतन करीब 40 मरीज कुत्तों के काटने के लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
एसएमओ डॉ. दिनेश छिल्लर ने बताया कि कई मामलों में बेसहारा कुत्तों के काटने की शिकायत आती है, जबकि कुछ केस ऐसे भी होते हैं जिनमें पालतू कुत्ते के काटने के बाद लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। कुत्ते के काटने के बाद मरीजों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं और जरूरी उपचार दिया जाता है।
एसएमओ ने कहा कि कुत्ते के काटने पर तुरंत प्राथमिक उपचार करना जरूरी है। सबसे पहले घाव को साबुन और साफ पानी से कम से कम 5 से 10 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद घाव पर एंटी सेप्टिक लगाया जाए और 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए।
कुत्ते के काटने का शिकार बने सोमेश ने बताया कि उनकी गली में चार कुत्ते हैं और अब तक उनका व्यवहार आक्रामक नहीं देखा गया था। वह रोज की तरह गली से गुजर रहे थे, तभी अचानक एक कुत्ते ने उनके हाथ पर काट लिया। उन्होंने बताया कि हाथ पर दांत का निशान लगा है और वह अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आए हैं।
पशु चिकित्सालय में एसडीओ डॉ. संजीव फोगाट ने बताया कि जब भी मौसम बदलता है तो कुत्तों में हीट का समय आता है। देसी प्रजाति (मोंगरेल) के कुत्तों में यह प्रक्रिया साल में दो बार होती है। इस दौरान कुत्तों के व्यवहार में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है और वे थोड़ा अलग तरीके से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
सरकार की ओर से जरूरत मंद परिवारों को दयालु योजना के तहत आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान है। इस योजना के तहत कुत्ते के काटने के मामले में मुआवजा दिया जाता है। यदि कुत्ते के काटने से एक दांत का निशान बनता है तो कम से कम 10 हजार रुपये और अगर मांस नोचने जैसी गंभीर चोट लगती है तो कम से कम 20 हजार रुपये तक सहायता दी जा सकती है।
सहायता पाने के लिए पीड़ित को अस्पताल से मिली मेडिकल रिपोर्ट के साथ डीसी कार्यालय में आवेदन करना होता है। इसके लिए अस्पताल का मेडिकल रिकॉर्ड और कुत्ते के काटने से संबंधित प्रमाण देना जरूरी होता है।
नागरिक अस्पताल गोहाना में कुत्तों के काटने से बढ़ रहे मरीज। संवाद- फोटो : samvad