रोहतक। प्रदेश के कर्मचारियों को सरकार एक श्रेणी में लाने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर कॉमन कैडर लागू किया जा रहा है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय व पीजीआईएमएस के कर्मचारियों को भी कैडर में शामिल करने की तैयारी है। इस कॉमन कैडर पॉलिसी के खिलाफ कर्मचारियों में ही नहीं, पीजीआई के वरिष्ठ चिकित्सकों में भी रोष पनप रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि पॉलिसी लागू होते ही करीब 15 चिकित्सक संस्थान को अलविदा कह सकते हैं। कुछ यही हाल गैर शिक्षक कर्मचारियों का है। ऐसे में संस्थान की व्यवस्था चरमरा सकती है। शिक्षक व समिति इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है।
कॉमन कैडर को लेकर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के शिक्षक व गैर शिक्षक कर्र्मचारियों में खासा रोष है। एमडीयू समेत सभी विश्वविद्यालयों में इस नई पॉलिसी को लेकर ज्ञापन देने के अलावा विरोध प्रदर्शन के जरिये भी नाराजगी जाहिर की जा चुकी है। पीजीआई भी इससे अछूता नहीं है। कर्मचारियों व चिकित्सकों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने इन्हें पॉलिसी में शामिल नहीं करने का आश्वासन दिया था। पिछले दिनों एमबीबीएस विद्यार्थियों की बॉन्ड पॉलिसी के समर्थन में हड़ताल में शामिल हुई स्वास्थ्य विज्ञान विवि की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कॉमन कैडर को लेकर फिर मुद्दा उठाया था। समिति ने नए साल में पॉलिसी लागू होने का अंदेशा जताया है। इससे कर्मचारियों व चिकित्सकों में कौतूहल मचा है। हालात इस कदर बन रहे हैं कि पॉलिसी लागू होने पर करीब 15 वरिष्ठ चिकित्सकों ने संस्थान को ही अलविदा कहने का मन बना लिया है। हालांकि इनकी नौकरी अभी कुछ वर्ष और बाकी है। इसके बावजूद ये चिकित्सक कहीं दूसरी जगह जाने से परहेज बरतते नजर आ रहे हैं। इनमें कुछ विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। चिकित्सकों ने संस्थान से समय से पहले सेवा विराम लिया तो यहां की व्यवस्था चरमराना तय है।
घर जाने के इच्छुक कर्मचारी हैं तैयार
पीजीआई के कुछ गैर शिक्षक कर्मचारियों व चिकित्सकों की मानें तो प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। यहां स्टाफ की जरूरत है। इसके लिए पीजीआई से अनुभवी स्टाफ को वहां भेजा जाएगा। ऐसे में अपने घर या घर के पास काम करने का अवसर मिलेगा। इसलिए कुछ लोग करनाल, मेवात, खानपुर तो कुछ नारनौल भी जाना चाहते हैं। इसमें नर्सों के अलावा लैब टेक्निशियन, ओटी व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इन्होंने सरकार के दिए विकल्प में भी घर जाने की इच्छा जाहिर की है। इसी मुद्दे को लेकर यूनियनें व समिति दो फाड़ नजर आ रही है।
वर्जन:
कॉमन कैडर लागू करने की जानकारी मिली थी। फिलहाल यह मुद्दा लंबित है। सरकार यदि इसे लागू करती है तो संस्थान के कर्मचारियों को रियायत दिए जाने का आग्रह किया जाएगा। इसके अलावा सही रास्ता भी अपनाया जाएगा।
- रवि सांगवान, प्रधान, गैर शिक्षक संघ, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय।