निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों से बीएएमएस कर रहे विद्यार्थी बृहस्पतिवार को
पीजीआई में धरने पर बैठ गए। कुलपति कार्यालय के बाहर हंगामा कर उन्होंने
विवि पर गलत तरीके से फेल करने का आरोप भी जड़ा। हालांकि शाम को वे आंदोलन
की चेतावनी देकर लौट गए। उधर, विवि के परीक्षक नियंत्रक ने आरोपों को सिरे
से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि जिन विषयों में विद्यार्थी फेल हुए
हैं उनमें अधिक मेहनत की जरूरत है। शिक्षक भी अधिक ध्यान दें।
विद्यार्थी
तुलसी, अंकित शर्मा, सूरज, मोनिका और कुलदीप ने बताया कि अष्टांग और
एनाटमी विभाग में उन्हें गलत तरीके से फेल किया गया है। सीसीआईएम की गाइड
लाइन के हिसाब से परीक्षा का प्रश्नपत्र नहीं दिया गया था। इसमें 14 अंक के
आयुर्वेद के सवाल और 76 अंक के मॉर्डन चिकित्सा के बारे में सवाल पूछे गए।
जबकि यह 45-45 अंक के पूछे जाने थे। उन्होंने बताया कि सप्ली क्लीयर होने
के छह माह बाद उन्हें दूसरी कक्षा में बैठने दिया जाता है, इससे उनका बैक
लग जाता है।
आंदोलन की चेतावनी
विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि
यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे और जरूरत पड़ी तो
आंदोलन भी करेंगे। वहीं, आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थियों का साथ देने
यूनिवर्सिटी और कॉलेज के छात्र नेता भी पहुंचे।
हेल्थ विवि की ओर से जारी परिणाम की स्थिति
कॉलेज विषय परीक्षार्थी उत्तीर्ण प्रतिशत
कुरुक्षेत्र एनाटमी 51 36 70.59
अष्टांग 51 31 60.78
ब्राह्मणवास एनाटमी 1 0 00.00
गुड़गांव एनाटमी 115 81 70.43
अष्टांग 105 56 53.33
चरखीदादरी एनाटमी 71 21 29.58
अष्टांग 61 09 14.75
जगाधरी एनाटमी 71 44 61.97
अष्टांग 66 27 40.91
सिरसा एनाटमी 61 25 40.98
अष्टांग 50 29 58.00
यमुना नगर एनाटमी 50 39 78.00
अष्टांग 50 30 60.00
अधिकारी बोले- विद्यार्थियों को अधिक मेहनत की जरूरत
कोई
भी विद्यार्थी आकर अपनी उत्तर पुस्तिका की जांच करवा सकता है। परीक्षा का
परिणाम बिल्कुल सही है। कई विद्यार्थी पास भी हुए हैं। एनाटमी और अष्टांग
कठिन विषय हैं, इसमें अधिक मेहनत की जरूरत होती है। जिन कॉलेजों का परिणाम
खराब आया है उनके प्राचार्य को बुलाया गया है, उनके यहां इन विषयों के
शिक्षकों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है। विद्यार्थियों को यदि कोई समस्या
है तो उन्हें अपने प्राचार्य के माध्यम से डीन से संपर्क करना चाहिए। वे
सीधा आए हैं, हम उनकी समस्या सुन रहे हैं। लेकिन जब गुंजाइश ही नहीं है तो
क्या करें।
- डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक, हेल्थ विवि।