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घरों में बेकार पड़ी वस्तुओं का करें निस्तारण

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उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक करें। गांवों के तालाबों में मच्छर पनपने से रोकने को कदम उठाए जाएं। वह लघु सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
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उपायुक्त ने कहा कि जागरूक करने के लिए कृषि व किसान कल्याण विभाग को जोड़ें। कृषि विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे कृषि मेलों में लोगों को जानकारी दी जाए। पिछले साल डेंगू और मलेरिया के मामले कम आए थे, चिकनगुनिया का कोई केस नहीं था। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे घरों में बेकार पड़ी वस्तुओं का निस्तारण करें। यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी पानी खड़ा नहीं हो। गड्ढों में खड़े पानी में मिट्टी का तेल और तालाबों में गंबूजिया मछली डाली जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छर जनित रोगों से बचाव को किए जा रहे सभी प्रबंधों की डॉक्यूमेंट्री तैयार की जाए। उपायुक्त ने जिले में उपलब्ध फॉगिंग मशीनों के बारे में जानकारी हासिल की। सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। इन सभी बीमारियों का इलाज सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। सरकार ने चिकनगुनिया व डेंगू की जांच की फीस 600 रुपये निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि अगर घरों या कार्यालयों में लारवा मिलता है तो जुर्माने का प्रावधान है। इस मौके पर एडीसी महेंद्रपाल, पशुपालन उप निदेशक डॉ. सूर्य खटकड़, उप सिविल सर्जन डॉ. सत्यवान, डॉ. अनिलजीत त्रेहन, डीईओ डॉ. विजय लक्ष्मी नांदल, महिला व बाल विकास अधिकारी बिमलेश कुमारी, डॉ. सुरेश भारद्वाज भी मौजूद रहे।
कोविड टीकाकरण में लें धार्मिक नेताओं की मदद
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोविड टीकाकरण में धार्मिक व सामाजिक नेताओं की मदद लें ताकि उसका लक्ष्य पूरा किया जा सके। समाज में धार्मिक व सामाजिक नेताओं का समाज में ज्यादा प्रभाव होता है। पुलिस विभाग के 80 प्रतिशत अधिकारियों व कर्मचारियों का टीकाकरण हो चुका है। कोविड संक्रमण से बचाव को सरकार ने विभिन्न वर्गों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकारी केंद्रों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है।
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परिवार नियोजन की दें वार्षिक रिपोर्ट
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने जिले में परिवार नियोजन के कार्य की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नसबंदी के असफल मामलों की वर्ष अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार नसबंदी के असफल मामलों में मुआवजा प्रदान किया जाता है। जिलास्तरीय समिति ऐसे मामलों पर फैसला लेती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में परिवार नियोजन का अभिप्राय बच्चों के जन्म में उचित अंतर रखना है ताकि बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो और उनकी परवरिश ठीक ढंग से हो सके।
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