संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल शुरू की गई है। अब सरकारी स्कूलों में कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के छात्र डिजिटल उपकरणों के माध्यम से दूरी और दिशा मापना सीखेंगे।
शिक्षा निदेशालय की तरफ से शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अब पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। क्लास रेडीनेस प्रोग्राम के अंतर्गत छात्रों को गूगल मैप जैसे डिजिटल टूल का उपयोग सिखाया जाएगा।
इसके जरिए बच्चे अपने घर से स्कूल, बाजार या अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की दूरी और वहां पहुंचने में लगने वाले समय का अनुमान लगाना सीखेंगे। इस पहल से छात्रों की गणितीय समझ में सुधार होगा और वे तकनीक का उपयोग भी बेहतर तरीके से कर पाएंगे।
साथ ही, उन्हें उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिशाओं की पहचान भी डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिससे उनकी भौगोलिक समझ मजबूत होगी।
जिले में कक्षा पांचवीं से आठवीं तक करीब 17 हजार 700 विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित होंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रयोगात्मक और तकनीक-आधारित शिक्षण से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।
गतिविधियों से बढ़ेगी सीखने की रुचि
विद्यार्थियों को अपने दिनचर्या का विवरण लिखना, यात्रा का वर्णन करना और दैनिक खर्चों का हिसाब रखना सिखाया जाएगा। इससे उनकी लेखन क्षमता और तार्किक सोच का विकास होगा। साथ ही, कक्षा चार और पांच के छात्रों के लिए शब्द पहेली, ध्वनि मिलान, नक्शा बनाना और समूह कार्य जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।
जिससे सीखने की प्रक्रिया रोचक बनेगी। इस पहल से बच्चों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी। डिजिटल और व्यावहारिक शिक्षा के इस संयोजन से छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक तैयार हो सकेंगे।
माप-तौल से आसान होगी गणित की समझ
छात्रों को माप-तौल की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए रस्सी, स्केल व अन्य उपकरणों का उपयोग सिखाया जाएगा। उन्हें लंबाई, दूरी और समय की गणना के सरल तरीके समझाए जाएंगे। इस पहल से बच्चे रोजमर्रा की जिंदगी में गणित के उपयोग को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। कार्यक्रम में दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
वर्जन :
शिक्षा को तकनीक से जोड़कर बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान देने की कोशिश है। इससे छात्रों में दूरी, माप-तौल और दिशा को लेकर जिज्ञासा बढ़ेगी। यह पहल उनके लिए काफी ज्ञानवर्धक साबित होगी।
-बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी