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Rohtak News: पीजीआई में अनुवांशिक रोगों की जांच होगी आसान, मिलेगी कैपिलरी इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीन

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01...पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय।
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अभिषेक कीरत
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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को गंभीर और आनुवांशिक बीमारियों की समय रहते पहचान में अहम भूमिका निभाने वाली कैपिलरी इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीन की सुविधा जल्द मिलने वाली है। संस्थान की तरफ से इसकी खरीद की मंजूरी मिल गई है, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसका मूल्य लगभग 60 लाख है। इससे मरीजों का जल्द और सही इलाज संभव हो हो सकेगा

पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि प्रदेश के किसी भी चिकित्सा संस्थान में इस मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह एचपीएलसी मशीन का एडवांस वर्जन है जो रक्त के साथ यूरिन के अलग-अलग तरह के सैंपलों की जांच करने में सक्षम है। दूसरा, ये एचपीएलसी मशीन से ज्यादा संवेदनशील है जो गहनता से जानकारी उपलब्ध कराती है। संवाद
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शोध में भी होगी सहायक कैपिलरी इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीन आधुनिक लैब जांच तकनीक भी है जिसका उपयोग खून और अन्य सैंपलों को अलग-अलग पहचानने के लिए किया जाएगा। रक्त से जुड़ी शोध के लिए भी यह मशीन मील का पत्थर साबित होगी।
रक्त के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलने वाले अनुवांशिक कारणों के बारे में गहनता से जानने में मदद करेगी। शुरुआत में मशीन का उपयोग शोध के तौर पर किया जाएगा। धीरे-धीरे मरीजों के लिए भी मशीन का उपयोग शुरू कर दिया जाएगा।
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हीमोग्लोबिनोपैथी की जांच में सहायक
हीमोग्लोबिनोपैथी आनुवंशिक रक्त विकारों का समूह है जो लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन प्रोटीन को प्रभावित करता है। इससे असामान्य हीमोग्लोबिन बनता है या सामान्य हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। ये अनुवांशिक कारणों से माता-पिता से बच्चों में जाते हैं। इससे एनीमिया, थकान और दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
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