13सीटीके39....माता दरवाजा स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर से निकली गई भगवान शालिग्राम की बारात मे
रोहतक। माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर बुधवार को तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विवाह हिंदू रीतिरिवाज के साथ मनाया। साध्वी मानेश्वरी देवी के देखरेख में संकट मोचन हनुमान मंदिर से शालिग्राम की बरात निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में शामिल भक्त नाचते गाते व आतिशबाजी के केवल गंज पहंचे। जहां पर तुलसी मां को लाल चुनरी ओढ़ाकर दुल्हन की तरह सजाया गया। शृंगार का सामान भी अर्पित किया गया।
रंगबिरंगी रोशनी व फूलों से सुसज्जित रथ पर विराजमान भगवान शालिग्राम की सवारी निकाली। साध्वी गायत्री की प्रतिभा भी रथ पर रखी गई। बरात का भक्तों ने रास्ते में ठहराव कर चाय, बिस्किट प्रसाद के रुप में वितरित किए। बारात पुराना सदर थाना, गढ़ी मोहल्ला, बाबरा मोहल्ला, बड़ा बाजार से होते हुए केवल गंज सावन मल व आशा विज तुलसी माता के यहां पहुंची। यहां लड़की पक्ष की ओर से पुष्प वर्षा कर बरातियों का स्वागत किया। वैदिक मंत्रोचार के साथ माता तुलसी शालिग्राम प्रभु संग फेरे व डोली और विदाई की रस्म निभाई गई। विवाह में सैकड़ों की संख्या में लोग तुलसी शालिग्राम विवाह के साक्षी बने। साध्वी मानेश्वरी देवी ने बताया कि तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे का शालिग्राम से हिंदू परंपरा अनुसार विवाह कराया गया शालिग्राम को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। तुलसी विवाह को कन्यादान के बराबर माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राप दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओ। जिसके बाद इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया। तभी से शालीग्राम और तुलसी के विवाह को एक त्योहार के तौर पर मनाया जाता है।