रोहतक। पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) में विद्यार्थियों को पास कराने के खेल ने परीक्षा शाखा की गोपनीयता व सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल है विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा शाखा से कैसे बाहर आईं। इनमें नए सिरे से उत्तर लिखे जाने के बाद वापस जमा कराना एक-दो व्यक्ति या कर्मचारियों के बस की बात नहीं है। इस खेल में बड़े नाम शामिल होने का भी अंदेशा है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। सही ढंग से जांच हुई तो कई बड़े अधिकारियों का नपना तय है।
यूएचएस में नकल के खेल की चर्चा मंगलवार को दिनभर गरमाई रही। यही नहीं, पीजीआईएमएस के चिकित्सकों के व्हाट्सएप ग्रुप में भी यह मुद्दा छाया रहा। यहां हर किसी ने कटाक्ष किए। किसी ने व्यवस्था को दाेषी ठहराया तो किसी ने प्रशासनिक कमजोरी के चलते गिरोह का हावी होना बताया। कारण चाहे जो भी रहा हो चिकित्सा संस्थानों से पेशेवर चिकित्सकों के साथ बड़ी संख्या में नकल से पास होने की बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।
चर्चा यह भी गरमाई हुई है कि विवि की सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता है। प्रशासनिक भवन में आम आदमी के लिए घुसना तक नामुमकिन है। खासकर कुलपति व परीक्षा शाखा की सुरक्षा ज्यादा पुख्ता होने का दावा किया जाता है। सुरक्षा के लिए यहां गार्डों की तैनाती के अलावा सीसीटीवी भी लगे हैं। बाहरी व्यक्ति के यहां कदम रखते ही गार्ड उन्हें घेर लेते हैं। उनका नाम पता ही नहीं मोबाइल नंबर तक रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है। इस कड़े सुरक्षा पहरे के बावजूद परीक्षा शाखा से उत्तर पुस्तिकाओं का निकलना व उत्तर लिखने के बाद बगैर किसी रोकटोक के दोबारा जमा कराना अपने आप में सवाल खड़े करता है। ऐसे में केस की गहन जांच जरूर है।
विद्यार्थी का मकसद उत्तर पुस्तिका का हर पन्ना भरना
शिकायत में कहा गया है कि नकल के खेल में शामिल विद्यार्थी पाठ्यक्रम से असंबंधित सामग्री लिखते थे। उत्तर पुस्तिकाओं को इस तरह से भरने का इरादा रखते थे कि निरीक्षक उन्हें क्रॉस-मार्क न कर सकें। उनका मकसद अपनी उत्तर पुस्तिका को ऐसे पेन से पूरी तरह भरना रहता था। बाद में इसमें सही जवाब भरे जाते थे।
यह है मामला
यूएचएस में अरसे से नकल का खेल चल रहा था। उत्तर पुस्तिका में ऐसे पेन से जवाब लिखने व बाद में उन्हें मिटाकर सही जवाब लिखकर छात्रों को पास कराने के इस मामले की शिकायत की गई थी। मामले का खुलासा होने पर कुलपति ने परीक्षा शाखा के दो कर्मचारियों को निलंबित कर व तीन अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाओं पर रोक लगा दी है। यही नहीं, इस शाखा के पांच कर्मचारियों समेत 12 कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित भी कर दिया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। विवि प्रशासन इस मामले में फिलहाल मौन है।
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खुफिया विभाग ने मांगी तथ्यों सहित रिपोर्ट
इस मामले में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में बैठक हुई। यहां पुलिस अधीक्षक व यूएचएस के कुलपति विशेष रूप से मौजूद रहे। मामले की शिकायत करने वाले युवक को भी बुलाया गया। युवक से मामले में पूछताछ कर तथ्य जाने गए। यही नहीं, बैठक के बाद विवि के निलंबित किए गए एक कर्मचारी को सीआईए ने पूछताछ के लिए बुलाया। इधर, खुफिया विभाग ने इस मामले में जानकारी जुटाई, साथ ही अपनी टीम से मामले से जुड़े तथ्यों की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।