जाट शिक्षण संस्था के उपप्रधान धर्मराज अब अपने पद पर नहीं बने रहेंगे। स्टेट रजिस्ट्रार ने इन्हें दो वर्ष की सजा भुगतने के चलते नियमानुसार अयोग्य घोषित कर दिया है। स्टेट रजिस्ट्रार की ओर से जिला रजिस्ट्रार को इस पद के लिए दोबारा चुनाव कराने के आदेश दिए गए हैं। कॉलेजियम सदस्य बोहर निवासी कृष्ण ने याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई करते हुए स्टेट रजिस्ट्रार ने फैसला सुनाया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह फैसला जाट संस्था के हित में सत्य की जीत है। संस्था के 23 जून को हुए चुनाव में उपप्रधान पद पर चयनित धर्मराज व महासचिव पद पर चयनित नवदीप के खिलाफ उनकी आजीवन सदस्यता को अवैध बताते हुए याचिका दायर की गई थी। मामले में उपप्रधान पद पर चयनित धर्मराज दोषी पाए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत दो वर्ष की जेल काटने के चलते वे संस्था के आजीवन सदस्य होने के नियमों को पूरा नहीं करते हैं, जबकि संस्था की आजीवन सदस्यता ग्रहण करते समय सदस्यता की सभी शर्तों को पूरा करना कानूनी तौर पर अनिवार्य है। इसके चलते उन्हें पद से हटा दिया गया है।
महासचिव भी आजीवन सदस्य बनने की सभी शर्तें पूरा नहीं करते हैं। स्टेट रजिस्ट्रार ने इनका मामला अभी अपने पास सुरक्षित रखा है। इस पर जल्द फैसला आने की उम्मीद है। महासचिव चुने गए नवदीप संस्था के आजीवन सदस्य बने, तब वे नाबालिग थे, जबकि नियमानुसार सदस्यता के लिए समुदाय के व्यक्ति का बालिग होना जरूरी है। इस बारे में संस्था संविधान व कानून में स्पष्ट लिखा है।
कृष्ण का कहना है कि वर्ष 2012 में तत्कालीन सरकार में कार्यरत आईएएस अधिकारी चंद्र प्रकाश को संस्था चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी लगाया गया था। वे वर्तमान में आदमपुर हलके से कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं। उन्होंने उस समय चुनाव कराने से पहले मतदाता सूची फाइनल करने के लिए स्पष्ट तौर पर यह आधार बनाया था कि व्यक्ति जाट समुदाय से हो व सदस्यता हासिल करते समय उसकी आयु न्यूनतम 18 वर्ष हो। उनके बनाए आधार के अनुसार नवदीप का नाम मतदाता सूची से कटना चाहिए था, जबकि ऐसा नहीं किया गया।
उपप्रधान की सदस्या मामले में अभी जानकारी नहीं है। रोहतक आकर इस बारे में पता किया जाएगा। अदालत या प्रशासनिक निर्देश मान्य हैं। इनका पालन किया जाएगा। यदि उपप्रधान की सदस्यता रद्द की गई है तो अदालत में अपील की जाएगी।
- गुलाब सिंह दिमाना, प्रधान, जाट शिक्षण संस्था।