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चिकनगुनिया वैरियंट का वार, मरीज-डॉक्टर बेजार

Thu, 15 Sep 2016 02:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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जांच रिपोर्ट में पकड़ में नहीं आ रही बीमारी, निजी अस्पताल संचालक कर रहे लूट - फोटो : amar ujala
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मलेरिया, डेंगू, वायरल और चिकनगुनिया के साथ अब चिकनगुनिया वैरियंट बीमारी आफत बनकर खड़ी हो गई है। क्योंकि मरीजों में लक्षण तो डेंगू और चिकनगुनिया के मिलते हैं, लेकिन बीमारी चिकनगुनिया वैरियंट होती है। जांच रिपोर्ट में भी इस बीमारी की पुष्टि नहीं हो पाती और मरीज हर दिन टूटता जाता है। ऐसे में बीमारी से अंजान मरीजाें को झोलाछाप डॉक्टर, नीम-हकीम, निजी अस्पताल और झाड़फूंक वाले दोनों हाथों से लूट रहे हैं। इस बीमारी ने मरीज तो क्या डॉक्टरों को भी आफत में डाल दिया है।  
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं मेडिसन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एचके अग्रवाल के अनुसार यदि सही समय पर मरीज को उपचार दिया जाए तो बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। सही दवा और पर्याप्त तरल पेय पदार्थ देने से मरीज को बुखार के दिनों में अन्य होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया तथा चिकनगुनिया वैरियंट एडीज एजिप्ट मादा मच्छर से ही फैलता है। इसके लिए जरूरी है कि अपने आसपास सफाई रखी जाए, जिससे कि मच्छर को पनपने ही न दिया जाए। मरीज और सामान्य लोगों को इन दिनों भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए। इन दिनों चल रही बीमारी सांस लेने, खांसने और छींकने से एक-दूसरे को फैलती है।

लक्षण और बचाव

सामान्य डेंगू : इसमें मरीज की प्लेटलेट्स कम होती हैं। मरीज को बुखार भी होता है। मरीज को बुखार की दवा के साथ पेय पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है।

डेंगू हैमरेजिक : इसे डेंगू शाक सिंड्रोम कहा जाता है। यह एक गंभीर समस्या है। इसमें रक्तचाप कम हो जाता है और मरीज को लाल दाने के साथ रक्तस्त्राव होने लगता है। मरीज को नकसीर, पेशाब और दस्त के साथ खून आने लगता है। इसमें मरीज के एकदम प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं, जिससे मरीज की जान को खतरा हो जाता है। समय पर उपचार और पर्याप्त मात्रा में तरल पेय पदार्थ लेने से इस समस्या से निपटा जा सकता है।
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चिकनगुनिया

इसमें मरीज को हाई ग्रेड फीवर होता है। इसके साथ मांसपेशी के अलावा जोड़ों में दर्द होता है।

चिकनगुनिया वैरियंट

इसका वायरस अभी आईडेंटिफाई नहीं है। इसका वायरस जांच में निगेटिव आता है। चिकनगुनिया के मरीजों को पेन किलर के अलावा बुखार की दवा दी जाती है। इसमें प्लेटलेट्स गिरने का अधिक डर नहीं होता। मरीज को लगातार तरल पदार्थ लेते रहना अनिवार्य होता है। इसका वायरस सांस लेने के दौरान दूसरों तक फैलता है। इसको फैलाने में अधिक आर्दृता वाला गर्म वातावरण अधिक जिम्मेदार है। इसके अलावा घटते-बढ़ते तापमान में भी यह अधिक तेजी से फैलता है। इसके लिए जरूरी है कि आस पास साफ-सफाई रखें।
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