डेंगू के डंक को रोकथाम की तैयारी में लगा स्वास्थ्य विभाग अब डंक फैल रहा है या नहीं, इसे ही पुष्टि नहीं कर पा रहा है।
पीजीआई की ओर से डेंगू के मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग का कहना है ये आंकड़ा ज्यादा है और गलत है। जिले में डेंगू की पुष्टि का रिकॉर्ड मेरे पास कम है।
ऐसे में डेंगू के मरीजों की पुष्टि को लेकर ही स्वास्थ्य विभाग और पीजीआई प्रशासन में बहस छिड़ी हुई है।
दरअसल स्वास्थ्य विभाग की ओर से 21 मरीजों को डेंगू के मरीजों का आंकड़ा जारी किया गया है। जबकि पीजीआई प्रशासन का दावा है कि अब तक जांच में 316 डेंगू के मरीज की पुष्टि हुई है, इसमें रोहतक के 113 मरीज हैं। वहीं सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार का कहना है कि ये रिपोर्ट गलत है।
उनके रिकॉर्ड में महज 21 डेंगू के मरीज हैं। यही नहीं जो दो डेंगू के मरीजों की मौत की बात कही जा रही है उसमें एक मरीज की मौत डेंगू से नहीं हुई। ऐसे में पीजीआई प्रशासन ने दावा किया है कि सिविल सर्जन कार्यालय में सभी मरीजों के पते और मोबाइल नंबर दिए हैं।
सिविल सर्जन का आरोप, लिस्ट में एक नाम दो बार
पीजीआई की ओर से सौंपी गई लिस्ट पर सिविल सर्जन ने सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि लिस्ट में कई मरीजों के पते ही नहीं है और कई मरीजों के नाम दो-दो बार है। एक साथ 70-70 मरीजों के नाम के आगे नो एड्रेस फाउंड लिखा गया है। डॉ. शिवकुमार ने कहा कि हम कार्ड टेस्ट को पुख्ता नहीं मानते, यह गाइड लाइन है।
पीजीआई का दावा
पीजीआई का दावा है कि वे अपने यहां आने वाले मरीजों की पहले प्लेटलेट्स जांचते हैं। इसके बाद एन वन एस वन एंटीजन और फिर एलाइजा टेस्ट करते हैं। संस्थान जिन मरीजों को डेंगू होने की पुष्टि कर रहा है वे सभी एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर हैं। यह जांच विश्वभर में मान्य है।
ब्लड बैंक में कुछ प्लेटलेट्स का लंबा इंतजार
ब्लड बैंक में मरीजों को कुछ ब्लड ग्रुप का रक्त न होने के चलते उनसे संबंधित प्लेटलेट्स का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। एबी नेगेटिव, बी नेगेटिव और ओ पॉजिटिव ग्रुप के ब्लड की कमी है।
मेडिसन विभाग के डॉ. एचके अग्रवाल से सीधी बातचीत
सवाल : डेंगू कितने प्रकार का होता है?
जवाब : डेंगू क्लासिक, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम।
सवाल : हमारे यहां किस ग्रुप के मरीज हैं?
जवाब : यहां मिक्स है। समय पर उपचार कराने और अपने आसपास सफाई रखने की जरूरत है।
सवाल : क्लासिक डेंगू क्या है?
जवाब : इसमें प्लेटलेट्स गिरती हैं, लेकिन 70 फीसदी को प्लेटलेट्स नहीं चढ़ानी पड़ती। जब प्लेटलेट्स 20 हजार आ जाए या शरीर के किसी हिस्से से रक्त बहने लगे तो प्लेटलेट्स चढ़ाना हेाता है।
सवाल : डेंगू हैमरेजिक फीवर क्या है?
जवाब : इसमें नाक से या शरीर के किसी हिस्से से रक्त बहने लगता है। प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। फेफड़ा जाम हो जाता है और श्वास लेने में दिक्कत होती है। कई मरीज शाक में चला जाता है।
सवाल : डेंगू शॉक सिंड्रोम क्या है?
जवाब : इसमें ब्लड प्रेशर लो हो जाता है और बुखार रहता है।
सवाल : सबसे अधिक खतरनाक कौन सा डेंगू है?
जवाब : यदि किसी मरीज को दुबारा डेंगू होता है तो समस्या है। क्योंकि इसका वायरस अगेंसट एंटीबॉडी बना लेता है। इन मरीजों को अन्य मरीजों की अपेक्षा अधिक देखरेख की जरूरत होती है।
डेंगू से बचाव के मिल रहे स्टीकर और कडे़
दिल्ली से डेंगू से बच्चों को बचाने के लिए स्टीकर और हाथों में डालने वाले कड़े मिल रहे हैं। स्टीकर का बताया जा रहा है कि एक स्टीकर सारा दिन काम करता है। इस शरीर के किसी हिस्से में बच्चे को लगा तो दिन भर वह लगभग सेफ रहता है। ऐसे ही हाथ में कड़ा पहनाने का भी ऑप्शन है। हालांकि, यह अभी जिले में खुले आम नहीं मिल रहा है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि इसकी कीमत अधिक होने के कारण अभी यह लोकल मार्केट में नहीं आ पाया है।