पीजीआई के आपातकालीन विभाग में बुधवार सुबह डेंगू पीड़ित नेपाली महिला ने
दम तोड़ दिया। संस्थान में डेंगू की जांच की सुविधा और दक्ष डॉक्टरों की
टीम के बाद भी महिला की मौत से परिजन बिफर गए। उन्होंने आरोप लगाया कि
डॉक्टरों की लापरवाही से महिला की मौत हुई है।
डॉक्टरों ने उन्हें एक वार्ड
से दूसरे वार्ड में दौड़ाया लेकिन सही उपचार नहीं दिया। वहीं, संस्थान ने
महिला की मौत से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि महिला बिना उपचार लिए घर चली गई
थी, दोबारा लौटी तो हालत नाजुक थी। महिला की मौत के साथ जिले में डेंगू से
मरने वालों की संख्या दो हो गई है।
मूल रूप से नेपाल के ल्यूमनी
कपिलवस्तु की रहने वाली 28 वर्षीय संतोष बुखार से पीड़ित थी। मंगलवार सुबह
संतोष की ननद रीता और अन्य परिजन उसे पीजाीआई के आपातकालीन विभाग लेकर आए।
यहां डॉक्टरों ने डेंगू की जांच के लिए सैंपल लिए।
परिजनों का आरोप है कि
इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें कभी कमरा नंबर दो तो कभी कमरा नंबर छह में
बार-बार दौड़ाया। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि वे महिला को घर ले जाएं,
डॉक्टरों ने कोई उपचार भी नहीं दिया। शाम को छह बचे फिर परिजन महिला को
लेकर पीजीआई पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने उपचार करने में आनाकानी की। आरोप है
महिला की हालात नाजुक थी इसके बाद भी उपचार नहीं दिया गया और घर भेज दिया
गया।
रीता ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा कि अभी अपने मरीज को ले जाएं,
दोबारा लेकर आएं तब तक रिपोर्ट भी आ जाएगी। उपचार के अभाव में बुधवार सुबह
करीब सवा चार बजे संतोष ने दम तोड़ दिया है। संतोष का पति मदन फिलहाल नेपाल
में है, उसके आने तक शव पीजीआई के शवगृह में रखवा दिया गया है।
संतोष
की मौत से आहत, राजू, खेम बहादुर, रामप्रसाद, वीनू प्रसाद, सोनू, हरि और
बाबू राम ने बताया कि पीजीआई के डॉक्टरों की संवेदनशीलता मर चुकी है। संतोष
और वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। संतोष सुभाष नगर में रहकर कोठियों में काम
करके अपने दो बच्चों को पाल रही थी।
बोले एक्सपर्ट
संतोष को
चार-पांच दिन से बुखार था। उसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित देखरेख करनी
चाहिए थी। अब इस मामले में क्या रहा, यह जांच का विषय है। डेंगू के मामले
में दूसरों की गलती को भी भुगतना पड़ता है। हम अपने घर में तो सफाई कर लें,
लेकिन दूसरों के घरों का क्या करें।
- डॉ. विजय नागपाल, सुभाष नगर
बोले परिजन
बेटे
को डेंगू हो गया था। यहां की व्यवस्थाओं को देखकर निजी अस्पताल में उपचार
कराया। वहां करीब 15 हजार रुपये खर्च हो गए, लेकिन उसकी जान बच गई। संतोष
आर्थिक रूप से कमजोर थी वह नहीं खर्च पाई और बात यहां तक पहुंच गई।
प्रेम बहादुर, (मृतका का परिजन) सुभाष नगर।
पीजीआई में न स्पेशल वार्ड और न व्यवस्था
सूबे
के एकमात्र पीजीआई में डेंगू के मरीजों के लिए न तो स्पेशल वार्ड है और न
ही कोई अलग से व्यवस्था है। मरीजों का आरोप है कि कई बार तो डेंगू की जांच
भी नहीं की जाती। आरोप हैं कि मरीजों को प्लेटलेट्स भी नहीं मिल पा रहे
हैं, इसकी वजह मशीन का खराब होना बताया जा रहा था। संस्थान के ही एक
कर्मचारी को प्लेटलेट्स लाने के लिए हिसार और नांगलोई तक धक्के खाने पड़े।
थककर वह अपने मरीज का उपचार अब निजी अस्पताल में करवा रहा है। कैथल निवासी
मंजीत और रवि ने बताया कि उनके डेंगू के मरीज संस्थान में उपचाराधीन हैं,
लेेकिन यहां ध्यान नहीं रखा जाता।
आशंका: निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ तो नहीं
पीजीआई
में डेंगू के मरीजों को लेकर स्थिति और नीयत दोनों स्पष्ट नहीं है। नतीजा
यह है कि मरीज निजी अस्पताल की ओर भाग रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग जिले भर
में करीब 15-16 डेंगू के मरीजों की पुष्टि करता है, लेकिन निजी अस्पतालों
के वार्ड डेंगू पीड़ितों से भरे पड़े हैं। इसके उपचार के लिए निजी अस्पताल
15 से 50 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। आदेश के बाद भी निजी अस्पताल डेंगू
मरीजों का रिकार्ड स्वास्थ विभाग को नहीं दे रहे हैं। ऐसे में आशंका जताई
जा रही है कि पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की निजी अस्पतालों से
सांठ-गांठ चल रही है। निजी अस्पताल में डेंगू जांच के साथ एक्स-रे,
अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचें भी करवाई जा रही हैं।
पीजीआई का पक्ष
मरीज
संतोष उपचार के लिए आई थी, लेकिन वह बीच में अपने आप घर चली गई थी। वह जब
फिर आई तो बेहोश हो गई थी। इसके कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। यदि परिजनों
को कोई समस्या है तो वे शिकायत कर सकते हैं, इसकी जांच करवा दी जाएगी।
- सीमा दहिया, प्रवक्ता, पीजीआईएमएस।
प्लेटलेट्स बनाने की मशीन ठीक
कार्यकारी
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कमल नैन रतन ने बताया कि हमारे यहां प्लेटलेट्स
बनाने की कोई मशीन खराब नहीं है। आईसीयू की जो व्यवस्था है वह पहले से ही
है। अलग वार्ड इसलिए नहीं बनाया गया कि यह कोई संक्रमण फैलने वाली बीमारी
नहीं है। यदि मरीजों की संख्या महामारी का रूप लेती है तो अलग वार्ड बना
दिया जाएगा। पिछले 24 घंटे में बालरोग विभाग में 13 मरीज आए, इसमें छह को
दाखिल किया गया है। वहीं, बड़ों में 20 को दाखिल किया गया है। इसके अलावा
250 संदिग्धों के सैंपल लिए गए हैं।
बोले अधिकारी
डेंगू के
मरीजों के लिए किट हम खरीद कर देंगे। पीजीआई को पहले भी किट दी गई है अब
दो-तीन दिन में और किट उपलब्ध करवा दी जाएंगी। डेंगू के मरीज के लिए अलग
वार्ड और मच्छरदानी की व्यवस्था होनी चाहिए। अब तक जिले में दो मरीजों की
डेंगू से मौत हुई है और 15 मरीजों की पुष्टि हुई है।
- डॉ. शिवकुमार, सिविल सर्जन।
बोले उपायुक्त
डेंगू
का मामला गंभीर है। इसमें कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। इसके लिए क्या
व्यवस्था है और समस्या क्यों आ रही है, संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
- डीके बेहेरा, डीसी।
डेंगू के मरीजों के लिए सिविल सर्जन डॉ. शिवकुमार की राय
जांच की स्थिति
बुखार
शुरू होने के पांच दिन बाद डेंगू की जांच होती है। इसके लिए एनएसवन एंटीजन
टेस्ट होता है। इसे एंटीबॉडी एलाइजा टेस्ट भी कहा जाता है। इसकी रिपोर्ट
एकदम सटीक होती है। जबकि निजी अस्पतालों में कार्ड टेस्ट होता है, इसकी
रिपोर्ट पूरी सही नहीं होती।
ये खाएं-पीएं
दिन में चीनी व नमक का घोल दस बार
शुगर के मरीज : नमकीन शिकंजी
बीपी के मरीज : मीठी शिकंजी
दोनों बीमारी वाले : ग्लूकोज और सादा पानी बार-बार पीएं
तला हुआ आहार न लें, हल्का भोजन करें।
ध्यान दें
90
फीसदी को साधारण डेंगू होता है और 10 फीसदी को गंभीर। इनको खतरा 30 हजार
से नीचे प्लेटलेट्स आने पर होता है। इसलिए सभी को घबराने की जरूरत नहीं है।
शरीर पर लाल निशान, आंख, नाक व मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी, शौच में
खून आना, महिलाओं की माहवारी के दिन सामान्य से बढ़ना डेंगू के लक्षण हैं।
इससे ब्रेन हेम्रेज होने की आशंका बढ़ जाती है। इसमें खून जमने की
प्रतिक्रिया कमजोर हो जाती है और मरीज लकवाग्रस्त भी हो सकता है। ऐसे में
वेंटिलेटर और प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। मरीज को पैरासीटामॉल की गोली
लेनी चाहिए। कलेजे में जलन और भूख की कमी के दौरान एन्टी एसिड सिरप ली जा
सकती है।
साधारण डेंगू की पहचान
- हड्डी तोड़ बुखार
- सिर दर्द व जोड़ों में दर्द
- आंखों के चारों ओर दर्द
- भूख की कमी
- शरीर पर छोटे लाल दाने
खतरनाक डेंगू
- लाल दाने बडे़ होना और शरीर से रक्त का बहाव