रोहतक। सफाईकर्मियों को वेतन का भुगतान न होने औैर नौकरी से निकालने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कर्मचारियों हटाने से एक तरफ शहर में जगह-जगह कचरा फैल गया है, दूसरी तरफ तीन माह से हटाए गए कर्मचारियों को वेतन न मिलने व नौकरी बहाली न होने से नाराज नगर पालिका कर्मचारी संघ ने पूरे शहर की सफाई व्यवस्था ठप करने की चेतावनी दी है। मंगलवार को नगर निगम आयुक्त कार्यालय में प्रधान संजय बिड़लान ने कर्मचारियों की आपात बैठक बुलाई है।
नगर निगम ने कचरा उठान, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, सड़कों की सफाई का कार्य ठेके पर दे रखा था। पिछले ठेकेदार ने टेंडर खत्म होने के बाद 31 मार्च से ड्यूटी खत्म कर दी थी। निगम ने दूसरा ठेका किया, जिसमें मात्र 200 कर्मचारियों लिया गया। 300 कर्मचारियों न जनवरी, फरवरी व मार्च माह का वेतन मिला और अब बेरोजगार हैं। जो कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं, उनको भी वेतन नहीं मिल रहा है। ठेकेदार का तर्क है कि निगम ने उसकी राशि रोक रखी है। जबकि निगम आयुक्त का कहना है कि मामला अदालत में चल रहा है। कोर्ट से स्टे आर्डर जारी हैं। इसी खींचतान का खामियाजा सफाईकर्मी भुगत रहे हैं।
वेतन दिलवाने की जिम्मेदारी निगम के अधिकारियों की : बिड़लान
सोमवार को नौकरी से हटाए गए कर्मचारी निगम प्रांगण में एकत्रित हुए और निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कर्मचारी संघ के प्रधान संजय बिड़लान ने कहा कि उनको वेतन दिलवाने की जिम्मेदारी निगम के अधिकारियों की है। ठेकेदार से पूछते हैं तो कहा जाता है कि निगम ने उनके भुगतान पर रोक लगा रखी है। तीन माह से सफाई कर्मियों को वेतन नहीं मिला। मेयर मनमोहन गोयल ने भी 29 अप्रैल को शहरी निकाय मंत्री से मिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मंगलवार को बैठक बुलाई गई है। इस दौरान पूर्ण हड़ताल जैसा ठोस कदम उठाया जा सकता है।
आयुक्त ने भेजा मुख्यालय पत्र, मांगा तीन सवालों पर मार्गदर्शन
वहीं, सोमवार को निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने मुख्यालय पत्र भेजकर तीन सवालों पर मार्गदर्शन मांगा है। पूछा है कि क्या निगम नया टेंडर लगाए। दूसरा कर्मचारियों की सैलरी को लेकर क्या निर्णय ले। तीसरा सभी कर्मचारियों को कैसे समायोजित किया जाए।
मुख्यमंत्री से मिलने की भनक से सक्रिय हुआ प्रशासन, आयुक्त ने प्रधान को बुलाया
सफाईकर्मियों को पता लगा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल सोमवार को रोहतक में आ रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर वे मुख्यमंत्री को मांग पत्र देना चाहता थे। इसी बीच पुलिस अधिकारी ने प्रधान को फोन करके बताया कि मुख्यमंत्री दो जगह केवल शोक व्यक्त करने आ रहे हैं। थोड़ी देर बाद निगम आयुक्त ने प्रधान को बुलाया कि उनकी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी जाएगी। इसके लिए मुख्यालय पत्र लिखा है। तब जाकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मिलने की योजना रद्द की।
मई माह के आखिर में आएगी केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर टीम
उधर, स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर निगम प्रशासन परेशान हैं। क्योंकि टीम मई माह के आखिर में जांच करने आएगी। जबकि शहर में अभी से सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है।
मुख्यालय पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा गया है। जो हिदायत आएंगी, उनके अनुसार आगे कदम उठाया जाएगा। वे कर्मचारियों की परेशानी समझते हैं। जरूर कोई न कोई समाधान निकलेगा।
धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त नगर निगम