17-नागरिक अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे मरीज। संवाद
- फोटो : जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में इलाज कराते मरीज।
रोहतक। पीजीआई में किडनी डायलिसिस के लिए पहुंचने वाले मरीजों का इलाज ज्यादातर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर निर्भर है। संस्थान की ओर से कई साल पहलेे नई डायलिसिस मशीनों के लिए भेजी गई डिमांड अब तक अटकी हुई है। अब तक मशीनों की खरीद ही नहीं हो पाई है। यहां रोजाना पीपीपी मोड पर लगभग 70 से 80 मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है।
संस्थान के पास खुद की छह मशीनें हैं। इनसे केवल 20 मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। नागरिक अस्पताल में किडनी डायलिसिस सेंटर के प्रभारी डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि रोजाना डायलिसिस के लिए सात से आठ मरीज पहुंचते हैं। पीजीआई से भी कई मरीजों को यहां रेफर कर दिया जाता है।
पीजीआई ओपीडी में रोज 150 मरीज किडनी संबंधी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। इनमें से 50 मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता है। प्रदेश में हर शहर में किडनी डायलिसिस के लिए पीपीपी मोड पर सेंटर बनाए हुए हैं। यहां से मरीजों को वहां रेफर कर दिया जाता है। एक महीने तक के लिए मरीज वहां इलाज लेते हैं। इसके बाद फिर जांच के लिए पीजीआई आना पड़ता है।
किडनी डायलिसिस के लिए पहुंचने वाले मरीजों का पीपीपी मोड पर इलाज किया जा रहा है। संस्थान के पास अपनी छह मशीनें हैं। नई मशीनों की डिमांड भेजी हुई है।
-डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई