रोहतक। सांप के काटने पर इंसान डर से नहीं मरता बल्कि वह जब झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाता है तभी मरता है। सही समय पर अच्छे अस्पताल में पहुंचकर इलाज नहीं करवाता तो सर्पदंश में इंसान की मौत होती है।
ऐसे में हम सभी को ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता फैलानी होगी कि सांप के काटने पर झांड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। मरीज को तुरंत किसी अच्छे अस्पताल में लेकर जाएं। यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल का।
पीजीआईएमएस में वीरवार को कम्युनिटी मेडिसिन और फाउंडेशन फॉर पीपल सेंटिक हेल्थ सिस्टम नई दिल्ली की ओर से सामूहिक रूप से सर्पदंश से बचाव विषय पर वर्कशाॅप हुई। इसमें मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल रहे।
उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने की अपेक्षा सर्पदंश के बारे में लोगों में बहुत कम जागरूकता है। ऐसे में डॉ. रमेश वर्मा की ओर से आयोजित वर्कशॉप बहुत उपयोगी साबित होगी। निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि कुलपति हमेशा इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में साल में एक मिलियन सर्पदंश के केस होते हैं। 58 हजार की मृत्यु होती है। इनमें लोग झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ते हैं। डॉ. सिंघल ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की मुहिम है कि 2030 तक इसे आधा किया जाए।